मेहनत और सरकारी सहयोग का परिणाम, सूकर पालन से आर्थिक सशक्तिकरण की मिसाल

मेहनत और सरकारी सहयोग का परिणाम, सूकर पालन से आर्थिक सशक्तिकरण की मिसाल

रायपुर, धमतरी जिले के ग्राम बागतराई के निवासी अशोक कुमार चांद ने यह साबित कर दिया है कि यदि शासन की योजनाओं का सही तरीके से लाभ उठाया जाए और मेहनत एवं लगन के साथ कार्य किया जाए, तो सीमित संसाधनों के बावजूद आर्थिक आत्मनिर्भरता प्राप्त की जा सकती है। अनुसूचित जाति वर्ग से संबंधित चांद आज सूकर पालन के माध्यम से अपने परिवार की आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर ग्रामीण क्षेत्र के अन्य पशुपालकों के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं।

योजना का लाभ

पशुधन विकास विभाग द्वारा वर्ष 2024-25 में संचालित सूकर प्रजनन वितरण योजना के अंतर्गत पशु औषधालय कुरी के माध्यम से अशोक कुमार चांद को 2 मादा एवं 1 नर सूकर की इकाई उपलब्ध कराई गई। योजना की इकाई लागत 10,000 रुपये थी, जिसमें 90 प्रतिशत अनुदान शासन द्वारा प्रदान किया गया तथा शेष राशि हितग्राही द्वारा अंशदान के रूप में वहन की गई। योजना का लाभ उन्हें 21 जून 2024 को प्राप्त हुआ।

सूकर पालन में प्रगति

योजना का लाभ मिलने से पहले चांद के पास केवल 6 सूकर 5 मादा एवं 1 नर थे। वैज्ञानिक पद्धति से सूकर पालन, समय पर टीकाकरण, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, संतुलित आहार एवं पशुधन विकास विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन के कारण उनके सूकरों की संख्या लगातार बढ़ती गई। बेहतर प्रबंधन और प्रजनन के परिणामस्वरूप सूकरों की कुल संख्या बढ़कर 266 तक पहुंच गई।

आर्थिक उपलब्धि

सूकर पालन से उन्हें लगातार आर्थिक लाभ भी प्राप्त हुआ। वर्ष 2025 में उन्होंने 7 सूकरों का विक्रय कर अतिरिक्त आय अर्जित की। इसके बाद 12 जुलाई 2026 को उन्होंने 37 स्वस्थ एवं तैयार सूकरों का औसतन 6,000 रुपये प्रति सूकर की दर से विक्रय किया, जिससे उन्हें कुल 2 लाख 22 हजार रुपये की आय प्राप्त हुई। विक्रय के बाद भी उनके पास 15 वयस्क सूकर एवं 7 बच्चे शेष हैं, जो भविष्य में आय का स्थायी स्रोत बनेंगे।

तकनीकी सहयोग

अशोक कुमार चांद बताते हैं कि पशुधन विकास विभाग के अधिकारियों द्वारा समय-समय पर दिए गए तकनीकी परामर्श, टीकाकरण, रोग नियंत्रण तथा पशुपालन संबंधी प्रशिक्षण से उन्हें व्यवसाय को व्यवस्थित रूप से संचालित करने में काफी सहायता मिली। इससे पशुओं की उत्पादकता बढ़ी और मृत्यु दर में कमी आई।

आत्मनिर्भरता की ओर

आज सूकर पालन उनके परिवार के लिए एक सशक्त आजीविका का माध्यम बन चुका है। बढ़ी हुई आय से वे परिवार की आवश्यकताओं की पूर्ति करने के साथ-साथ बच्चों की शिक्षा, बेहतर पोषण तथा भविष्य की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित कर पा रहे हैं। उनकी सफलता से प्रेरित होकर आसपास के अनेक ग्रामीण भी पशुपालन को स्वरोजगार के प्रभावी माध्यम के रूप में अपनाने के लिए आगे आ रहे हैं।

शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं तभी सार्थक होती हैं जब उनका लाभ वास्तविक हितग्राहियों तक पहुंचे और वे उनका सदुपयोग कर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ें। अशोक कुमार चांद की सफलता इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण है कि पशुधन विकास विभाग की योजनाएं ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने, रोजगार सृजित करने तथा आर्थिक सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।