खाद के साथ जबरन अटैचमेंट पर सरकार सख्त, 381 फर्मों की बिक्री रोकी और 169 लाइसेंस निलंबित: कृषि मंत्री

खाद के साथ जबरन अटैचमेंट पर सरकार सख्त, 381 फर्मों की बिक्री रोकी और 169 लाइसेंस निलंबित: कृषि मंत्री

जयपुर। कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने शुक्रवार को विधानसभा में कहा कि उर्वरकों के साथ किसानों को जबरन अन्य उत्पाद जोड़कर देने की शिकायतों पर राज्य सरकार ने सख्त कार्रवाई की है। उन्होंने बताया कि कार्रवाई के तहत अधिसूचित 744 उर्वरक निरीक्षकों ने औचक निरीक्षण करते हुए 11,938 निरीक्षण किए तथा 18,319 उर्वरकों के नमूने लिए। इस दौरान 765 फर्मों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए, 381 फर्मों की बिक्री पर रोक लगाई गई और 169 विक्रेताओं के विक्रय प्राधिकार पत्र निलंबित या निरस्त किए गए।
कृषि मंत्री प्रश्नकाल के दौरान विधायक ललित मीणा द्वारा पुछे गए पूरक प्रश्नों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि कई बार उर्वरक के साथ ऐसे उत्पाद अटैच कर दिए जाते हैं जिनकी किसानों को आवश्यकता नहीं होती, जिससे उन पर अनावश्यक आर्थिक भार पड़ता है। इसे रोकने के लिए विभाग द्वारा उर्वरकों के साथ अन्य उत्पादों के जबरन अटैचमेंट पर रोक लगाने के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों को समय-समय पर निर्देश दिए गए हैं तथा उर्वरक विक्रेताओं और आपूर्तिकर्ताओं को भी चेताया गया है। उन्होंने बताया कि विभागीय अधिकारियों की ड्यूटी लगाकर विक्रेताओं के पास मौजूद रहकर उर्वरकों का वितरण कराया गया। उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए राज्य और जिला स्तर पर फर्टिलाइजर रेगुलेटरी टास्क फोर्स का गठन भी किया गया है।

कृषि मंत्री ने कहा कि “धरती माता बचाओ अभियान” के तहत उर्वरकों के संतुलित उपयोग, जबरन अटैचमेंट, राज्य से बाहर परिगमन, अवैध बिक्री और कालाबाजारी पर नियंत्रण के लिए जिला, ब्लॉक और पंचायत स्तर पर निगरानी समितियां भी बनाई गई हैं, ताकि उर्वरकों का डायवर्जन रोका जा सके। उन्होंने कहा कि कई बड़ी कंपनियों द्वारा भी जबरन अटैचमेंट की शिकायतें सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा स्वयं सूरतगढ़ जाकर 32 हजार यूरिया के बैग पकड़े गए ताकि उनका डायवर्जन रोका जा सके। 

उन्होंने कहा कि यदि बड़ी कंपनियों के खिलाफ शिकायतें आती हैं तो उनके खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच की जाएगी और लाइसेंस भी निरस्त किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती जिलों में पहले बनाए गए चेक पोस्ट की तरह अब पुलिस के सहयोग से और अधिक चेक पोस्ट स्थापित किए जाएंगे, ताकि उर्वरकों के डायवर्जन और तस्करी पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

इससे पूर्व मूल प्रश्न के लिखित उत्तर में कृषि मंत्री ने बताया कि भरतपुर और कोटा संभाग में सरसों की बुवाई क्षेत्रफल अधिक होने के कारण डीएपी उर्वरक की मांग भी अधिक रहती है। राज्य सरकार ने रबी सीजन शुरू होने से पहले ही एक लाख मीट्रिक टन डीएपी का स्टॉक सुनिश्चित किया था। रबी सीजन 2025-26 की शुरुआत में भरतपुर और कोटा संभाग में 30,658 मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध था। उन्होंने सदन में रबी 2025-26 का भरतपुर और कोटा संभागों के जिलों में डीएपी की मांग और उपलब्धता का जिला-वार विवरण भी उपलब्ध कराया गया है।

कृषि मंत्री ने बताया कि बारां और झालावाड़ जिलों में उर्वरकों के साथ जबरन अटैचमेंट की कुल 16 शिकायतें प्राप्त हुई थीं, जिन पर उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 के तहत संबंधित विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित या निरस्त किए गए। जबकि सीमावर्ती जिलों भरतपुर, धौलपुर, डीग, करौली, सवाई माधोपुर और कोटा में ऐसी कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई। उन्होंने बताया कि पूर्वी राजस्थान से अन्य राज्यों में उर्वरकों की तस्करी या परिगमन की 4 शिकायतें मिली थीं, जिनमें 28.55 मीट्रिक टन यूरिया और 17.50 मीट्रिक टन एसएसपी उर्वरक जब्त किए गए तथा संबंधित पुलिस थानों में 4 एफआईआर दर्ज करवाई गई।

कृषि मंत्री ने कहा कि पिछले छह माह (सितंबर 2025 से फरवरी 2026) के दौरान भरतपुर और कोटा संभाग में विभाग ने 1373 आदान विक्रेताओं के औचक निरीक्षण किए। उल्लंघन पाए जाने पर 53 विक्रेताओं के आदानों की बिक्री रोकी गई, 98 लाइसेंस निलंबित या निरस्त किए गए, 8 प्रकरणों में आदानों की जब्ती की गई तथा 2 विक्रेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई गई।