पंजाब में पहली बार जाति आधारित सर्वे, CM मान ने पेश किया 4 साल का ग्रामीण विकास रिपोर्ट कार्ड
चंडीगढ़: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने ग्रामीण विकास और पंचायत विभाग के चार साल के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड पेश करते हुए कई बड़े ऐलान किए। उन्होंने बताया कि राज्य में पहली बार 1 अप्रैल से जाति आधारित सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण शुरू किया जाएगा, जिसका उद्देश्य सभी वर्गों के जीवन स्तर का आकलन कर बेहतर नीतियां बनाना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले चार वर्षों में गांवों में बड़े स्तर पर विकास कार्य हुए हैं। बुनियादी ढांचे को मजबूत किया गया, रोजगार के अवसर बढ़ाए गए और प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाया गया। पंचायत चुनावों में सर्वसम्मति बढ़ी है और सरपंचों का मानभत्ता भी बढ़ाकर 2,000 रुपये कर दिया गया है।
सरकार ने ग्रामीण विकास पर खर्च बढ़ाया है। पंचायत भवन, लाइब्रेरी, खेल मैदान, पानी और स्वच्छता जैसी सुविधाओं पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। साथ ही, अवैध कब्जे हटाकर और शामलात जमीन लीज पर देकर राजस्व में भी बढ़ोतरी हुई है।
युवाओं के लिए करीब 3,000 खेल मैदान विकसित किए जा रहे हैं, वहीं गांवों में लाइब्रेरी और आधुनिक पंचायत घर बनाए जा रहे हैं। मनरेगा के तहत रोजगार बढ़ा है और लाखों लोगों को काम मिला है।
महिलाओं के सशक्तिकरण पर भी सरकार ने जोर दिया है। स्व-सहायता समूहों के जरिए लाखों परिवारों को जोड़ा गया है और महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जा रही है। डेयरी फार्मिंग से जोड़ने के लिए नई योजनाएं भी शुरू की गई हैं।
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि पंजाब के कई फंड रोके गए हैं। वहीं, उन्होंने भरोसा दिलाया कि गेहूं खरीद सहित किसानों से जुड़े सभी मुद्दों पर सरकार पूरी तरह तैयार है।
कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री ने दावा किया कि राज्य में पहली बार पारदर्शी और जनहित में काम करने वाली सरकार चल रही है, जो गांवों के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है।
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