दागी नेताओं के लंबित पांच हजार केसों में तेजी से होगी सुनवाई!
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट बुधवार को उस जनहित याचिका पर जल्द सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर विचार करने के लिए सहमत हो गया, जिसमें सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामलों की तेजी से सुनवाई और सीबीआई एवं अन्य एजेंसियों द्वारा त्वरित जांच की मांग की गई है। प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण की अध्यक्षता वाली पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता और न्याय मित्र विजय हंसरिया की इस दलील पर गौर किया कि याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने की जरूरत है।
हंसारिया ने कहा कि मौजूदा और पूर्व सांसदों, विधायकों और एमएलसी के खिलाफ लंबित मामलों का विवरण देने वाली एक नई रिपोर्ट अदालत में दायर की गई है और लंबित आपराधिक मामलों के त्वरित निपटान के लिए तत्काल, कड़े कदमों की आवश्यकता की माग की गई है। हंसारिया ने कहा कि हमलोग इसपर विचार करेंगे और जल्द निर्णय देंगे। गौरतलब है कि संसद सदस्यों और विधान सभा/परिषद के सदस्यों के खिलाफ कुल 4,984 मामले लंबित हैं, जिनमें से 1,899 मामले पांच साल से अधिक पुराने हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि दिसंबर 2018 तक लंबित मामलों की कुल संख्या 4,110 थी और अक्तूबर 2020 तक यह 4,859 था।
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