सीएए के विरोध में कथित भारत बंद के पर्चे बंटे, लेकिन बाजार खुले रहे

सीएए के विरोध में कथित भारत बंद के पर्चे बंटे, लेकिन बाजार खुले रहे
khemraj mourya शिवपुरी। देशभर में सीएए के विरोध के बीच कल शिवपुरी में एक कथित संगठन द्वारा शिवपुरी बंद का आव्हान किया गया था। लेकिन शिवपुरी में बंद आज पूरी तरह से फ्लोप रहा। बंद का आव्हान बाजार में पर्चे बांटकर किया गया था। शहर के बाजार प्रतिदिन की तरह सामान्य रूप से खुले रहे और जनजीवन पूर्व की तरह चलता रहा। हालांकि इस कथित पर्चे को लेकर सोशल मीडिया पर एक बहस छिड़ गई। जिसमें पर्चा वितरित करने वाले संगठन बहुजन क्रांति मोर्चा पर कार्रवाई करने की मंाग उठी। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हुआ कि बहुजन क्रांति मोर्चा किसका संगठन है। क्योंकि पर्चे पर किसी का नाम अंकित नहीं था। जो पर्चे छपवाए गए, उस पर प्रिंटिग प्रेस का नम्बर अंकित था। प्रेस के संचालक ने भी पर्चे छपवाने वाले के बारे में जानकारी नहीं दी। पर्चे में उल्लेख किया गया था कि 29 जनवरी 2020 को बहुजन क्रांति मोर्चा द्वारा सीएए, एनपीआर और एनआरसी के विरोध में भारत बंद का आव्हान किया गया है। सभी व्यापारियों से निवेदन है कि व्यापारी अपनी दुकाने बंद रखकर बंद को सफल बनाने में सहयोग दें। पर्चे में कुछ भ्रामक तथ्य भी प्रकाशित किए गए थे। जिन पर लोगों ने अपनी आपत्ति सोशल मीडिया के माध्यम से दर्ज कराई है। पर्चे में भ्रामक जानकारी प्रकाशित करते हुए लिखा गया है कि सीएए के अतंर्गत सभी हिंदु भाईयों को (एससीएसटी/ओबीसी, अन्य) नागरिकता नहीं दी जाएगी। इस कानून के तहत केवल उन हिंदु, सिक्ख, इसाई, जैन, पारसी व बौद्धों को नागरिकता दी जाएगी, जो धार्मिक आधार पर प्रताडि़त होकर पाकिस्तान, अफगानिस्तान तथा बांग्लादेश से 6 वर्ष पूर्व भारत आए थे। एनआरसी के तहत शेष सभी भारतीयों को प्रमाणित दस्तावेजों से सिद्ध करना होगा कि उनके पूर्वज 1950 से या इससे पूर्व भारत में निवास करते हैं। अनुमानत: आधे भारतीय दस्तावेजों के प्रमाणों के आधार पर यह सिद्ध नहीं कर सकेंगे। ऐसी स्थिति में उन भारतीयों का डिटेंसन कैम्प में कैद करके उनकी सम्पत्ति छीन ली जाएगी और उनका मताधिकार व अन्य संवैधानिक अधिकारों व मानवीय अधिकारों से वंचित कर दिया जाएगा।