नई दिल्ली, दिल्ली हाईकोर्ट ने बिहार शेल्टर होम मामले में बृजेश ठाकुर को आजीवन कारावास की सजा देने के निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर बुधवार को सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। निचली अदालत द्वारा मुजफ्फरपुर जिले में एक शेल्टर होम में 40 से अधिक लड़कियों के यौन उत्पीड़न के मामले में बृजेश ठाकुर को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस रजनीश भटनागर की बेंच ने निचली अदालत के 20 जनवरी और 11 फरवरी के फैसले को रद्द करने के अनुरोध वाली अपील पर सीबीआई को नोटिस जारी किया। पहले फैसले में बृजेश ठाकुर को मामले में दोषी ठहराया गया था और 11 फरवरी का आदेश सजा से संबंधित था। कोर्ट ने मामले में अगली सुनवाई 25 अगस्त को तय की है।
हाईकोर्ट ने कहा कि सीबीआई अगली तारीख से पहले स्टेटस रिपोर्ट या जवाब दाखिल करे। हाईकोर्ट ने सीबीआई से ठाकुर की उस याचिका पर भी जवाब मांगा है जिसमें उसने निचली अदालत द्वारा उस पर लगाए गए 32.20 लाख रुपये के जुर्माने पर रोक लगाने का अनुरोध किया है। यहां की एक निचली अदालत ने ठाकुर को 'मृत्यु तक कठोर उम्रकैद की सजा' सुनाई थी और उस पर 32.20 लाख रुपये का जुर्माना यह कहते हुए लगाया था कि वह सावधानीपूर्वक रची गई साजिश का मास्टरमाइंड था और उसने अत्यधिक विकृति दिखाई। बृजेश ठाकुर को आश्रय गृह में कई लड़कियों के यौन उत्पीड़न के जुर्म में सजा सुनाई गई। बिहार पीपुल्स पार्टी (बीपीपी) के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ चुके बृजेश ठाकुर के अलावा, निचली अदालत ने मामले में कई अन्य लोगों को भी उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
क्या है पूरा मामला
मुजफ्फरपुर में मुंबई के टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस (टीआईएसएस) ने पूरे बिहार में स्थित आश्रयगृहों का सोशल ऑडिट किया था। इसमें कहा गया था कि बृजेश ठाकुर द्वारा संचालित आश्रयगृह में नाबालिग लड़कियों के साथ लगातार यौन शोषण होता है। टीआईएसएस ने अप्रैल 2018 में अपनी रिपोर्ट जमा कराई थी। इसकी समीक्षा के बाद सरकार ने 31 मई, 2018 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। मामला सामने आने के बाद लड़कियों को आश्रयगृह से मधुबनी, पटना और मोकामा में शिफ्ट किया गया। बाद में जून में पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) के मेडिकल बोर्ड ने बालिका गृह की अधिकांश लड़कियों के साथ यौन शोषण होने की पुष्टि की। बालिका गृह में मौजूद 42 लड़कियों में से 34 लड़कियों के शोषण की पुष्टि हुई। लड़कियों ने अदालत के सामने अपनी आपबीती सुनाई थी कैसे उनके साथ लगातार शोषण किया जाता था। बात न मानने पर उनकी छड़ी से पिटाई होती थी। यहां गर्भवती होने पर लड़कियों का कथित तौर पर जबरन गर्भपात कराया जाता था।
ये पाए गए दोषी
बृजेश ठाकुर के अलावा कोर्ट ने इंदू कुमारी (बालिकागृह अधीक्षक), मीनू देवी (बालिकागृह में गृह माता), मंजू देवी (काउंसलर), चंदा देवी (बालिकागृह में गृह माता), नेहा कुमारी (नर्स), हेमा मसीह (केस वर्कर), किरण कुमारी (सहायक), रवि कुमार, विकास कुमार (सीडब्लूसी का सदस्य), दिलीप कुमार (सीडब्लूसी का अध्यक्ष), विजय तिवारी (चालक), गुड्डू पटेल, कृष्णा राम, रोजी रानी, रामानुज ठाकुर उर्फ मामू, रामाशंकर सिंह उर्फ मास्टर, डॉक्टर अश्विनी, नरेश प्रसाद और साइस्ता परवीन उर्फ मधु को दोषी करार दिया। वहीं, रवि रोशन दोषी ठहराए जाने के बाद कोर्ट में ही रोने लगा और आत्महत्या करने की धमकी देने लगा। इस मामले में विक्की नाम के व्यक्ति को कोर्ट ने बरी कर दिया।