भोपाल। ‘धनुष यज्ञ सुनि रघुकुल नाथा। हरषि चलेऊ मुनिवर के साथा।।’ गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरित मानस की इन पंक्तियों का संगीतमय वर्णन करते हुए सुप्रसिद्ध श्रीराम कथा वाचक पं. राम जाने महाराज ने कहा कि जनकपुरी में राम विवाह का प्रसंग बड़े ही उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।

उन्होंने शेखपुरा स्थित श्रीराम जानकी मंदिर परिसर में चल रहे रामकथा महोत्सव के पांचवें दिन हजारों श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि मुनिश्रेष्ठ विश्वामित्र के साथ यज्ञरक्षा के लिए वन में आए श्रीराम और लक्ष्मण को जब मुनिवर ने जनकपुरी में धनुष यज्ञ होने की जानकारी दी तो वे उत्साह और प्रसन्नता के साथ उनके साथ जनकपुर चल दिये। यहां मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने गुरुवर की आज्ञा से शिवधनुष का भंजन कर राजा जनक के संताप को दूर किया और उनकी सुपुत्री जानकी के साथ विवाह किया। श्रीरामकथा के दौरान आचार्यश्री ने श्रीराम लक्ष्मण के जनकपुर तथा पुष्पवाटिका भ्रमण के प्रसंग को भी रामचरित मानस की चौपाईयों की संगीतमयी प्रस्तुति के साथ सुनाया, जिस पर श्रद्धालु बार-बार झूम उठे। इस अवसर पर आयोजन समिति के प्रमुख प्रवक्ता रायसिंह परिहार, अर्जुन सिंह लवाना सहित विजय सिंह नायक, गोविंद सिंह नायक, चेयरमैन घूड़ीलाल, गुलाब चन्द्र लवाना, परशुराम, इमरत लवाना, पूर्व सरपंच जयसिंह, गोवर्धन लवाना के अलावा सैकड़ों महिला पुरुष श्रद्धालु उपस्थित रहे।
सिया मांगे अवध को राज
उधर पुष्प वाटिका में मां गौरी का पूजन करते हुए जानकी जी ने प्रभु श्रीराम को पति रूप में मांगा। ‘सिया मांगे अवध को राज सरयू नहाने को’ भजन के माध्यम से आचार्यश्री ने कहा कि सीताजी की मनोकामना पूर्ण करते हुए मां गौरी ने उन्हें जैसे मनचाहा वर दे दिया और कहा कि ‘सुन सिय सत्य अशीष हमारी। पूजहिं मनोकामना तुम्हारी।।’इस तरह जनकपुर की राजकुमारी जानकी जी ने श्रीराम के रूप में जैसे अयोध्या का राज ही मां गौरी से मांग लिया। श्रीराम-जानकी के विवाहोत्सव का मंचीय सौंदर्य अत्यंत भव्य था। लग रहा था जैसे समूचा शेखपुरा गांव पूरी तरह जनकपुर नजर आ रहा था, जिसने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।