त्रिकोणीय मुकाबले की गवाह बनेगी रामनगरी

त्रिकोणीय मुकाबले की गवाह बनेगी रामनगरी
sumit tiwari अयोध्या। रामनगरी इस बार त्रिकोणीय मुकाबले की गवाह बनेगी। मंदिर आंदोलन के चलते सियासी सुर्खियां बटोरने वाली अयोध्या के फैजाबाद संसदीय क्षेत्र का हिस्सा होने के कारण देशभर की निगाहें इस सीट पर लगी हैं। यहां भाजपा के साथ ही सपा ने भी उम्मीदवार का एलान कर दिया है, जबकि कांग्रेस ने अपने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. निर्मल खत्री को पहली ही सूची में उम्मीदवार घोषित कर दिया था। [caption id="attachment_187011" align="alignleft" width="226"]Ramanagari will be witness to tri-match lallu singh[/caption] [caption id="attachment_187012" align="alignleft" width="225"]nirmal khatri nirmal khatri[/caption] [caption id="attachment_187013" align="alignleft" width="225"]anand sen anand sen[/caption] उनके समर्थन में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी 70 किलोमीटर लंबा रोड शो कर चुनावी पारा चढ़ा चुकी हैं। भाजपा ने यहां से अपने सिटिंग सांसद लल्लू सिंह को उम्मीदवार बनाया है। वे लगातार चौथी बार मैदान में हैं। लल्लू सिंह अयोध्या से पांच बार विधायक और प्रदेश सरकार में मंत्री रह चुके हैं। उन्हें केंद्र एवं राज्य सरकार के साथ ही खुद के प्रयास से कराए गए विकास के साथ हिंदुत्व के एजेंडे पर भरोसा है। यहां से कांग्रेस ने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. निर्मल खत्री पर दांव लगाया है। खत्री अयोध्या से विधायक के साथ प्रदेश सरकार में मंत्री के अलावा दो बार सांसद रह चुके हैं। वे आठवीं बार चुनाव मैदान में कांग्रेस शासन में कराए गए विकास कार्यों की दुहाई देकर डटे हैं। इन दिग्गजों के बीच सपा उम्मीदवार के रूप में आनंदसेन यादव मैदान में हैं। दो बार विधायक रहे आनंदसेन तीन दशक तक जिले की सियासत की धुरी रहे पूर्व सांसद स्व. मित्रसेन यादव के पुत्र हैं। यहां से तीनों प्रमुख दलों ने महिला उम्मीदवार उतारने पर विचार नहीं किया। यहां से 1974 में आखिरी बार कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में सुचेता कृपलानी चुनाव लड़ी थीं। इसके बाद से आधी आबादी को अपनी बारी आने का इंतजार है।