rajesh dwivedi
सतना। कभी कर्मचारियों के हित की लड़ाई लड़ने वाली सपाक्स अब चुनाव मैदान में चुनावी दांव-पेंच लड़ाती नजर आएगी। हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा एससीएसटी एक्ट में सु्रपीम कोर्ट के फैसले पर किए गए संसोधन से भड़के सवर्ण आक्रोश को भुनाने के लिए सपाक्स ने चुनावी जंग में उतरने का निर्णय लिया है और इसके लिए संगठन द्वारा खासी मशक्कत की जा रही है।

फिलहाल एट्रोसिटी एक्ट के अलावा विसंगतिपूर्ण आरक्षण प्रक्रिया को मुद्दा बनाकर सपाक्स पदाधिकारी संगठन को धार देने में जुटे हुए हैं। सपाक्स ने चुनावी लड़ने में उतरने के लिए निर्वाचन आयोग से सिंबल भी मांगा है जो इस माह के अंत तक मिलने की उम्मीद है। सूत्रों की मानें तो सपाक्स जहां एक ओर अपनी विचारधारा के अनुसार सदस्यों को जोड़कर संगठन को विस्तार देने में जुटी है, वहीं सपाक्स की नजर भाजपा, कांग्रेस व बसपा के उन नेताओं पर भी है जो पार्टी की टिकट न मिलने से चुनावी रण में उतरने दूसरे दल की ओर निहार रहे हैं। सपाक्स के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि दूसरे दल के ऐसे नेता जो सपाक्स की विचारधारा के साथ साम्यता रखते हैं, उन्हें भी सपाक्स चुनाव मैदान में उतारने से नहीं हिचकेगी। बहरहाल यह देखना दिलचस्प होगा कि सपाक्स यदि चुनाव में उतरता है तो किसी विधानसभा में कारगर परिणाम लाएगा अथवा सपाक्स की उपस्थिति इस चुनाव में केवल वोट कटौवा की होगी?
6 सितंबर के बंद से मिली ताकत
सपाक्स को चुनावी मैदान में उतरने की ताकत 6 सितंबर को सपाक्स द्वारा आयोजित किए गए ऐतिहासिक बंद के बाद मिली है। जिस प्रकार से तुगलकी एट्रोसिटी एक्ट को लेकर विंध्य समेत समूचे प्रदेश में लामबंद हुए उससे सपाक्स के कर्ता धर्ताओं को चुनावी सफलता की आस जगी और उन्होंने एक बड़े वर्ग के हित में चुनाव लड़ने का फैसला ले लिया। अब संगठन पदाधिकारी लगातार जिले की सातों विधानसभा में कार्यक्रमों का आयोजन कर सपाक्स की आवाज को बूथ लेबल तक पहुंचाने की कवायद कर रहे हैं। संगठन पदाधिकारियों ने इसके लिए विस्तृत योजना बनाईै है जिसका खुलासा बुधवार को आयोजित एक पत्रकार वार्ता में किया गया। सपाक्स पदाधिकारियों का कहना है कि एट्रोसिटी एक्ट के अलावा जातिगत आरक्षण देकर सरक ार वोटबैंक के लालच में एक बड़े वर्ग पर अत्याचार कर रही है, जिसके चलते सपाक्स ने सिस्टम परिवर्तन के लिहाज से चुनावी रण में उतरने का निर्णय लिया है।
रैगांव-रामपुर से सर्वाधिक आवेदन
सपाक्स का अभी सिंबल अलाट नहीं हुआ है लेकिन सपाक्स की टिकट पर चुनाव लड़ने के लिए अब 26 लड़ाके आवेदन कर चुके हैं। सर्वाधिक आवेदन रैगांव व रामपुर बाघेलान विधानसभा क्षेत्र से हैं। बताया गया कि रैगांव से जहां 6 लोगों ने टिकट के लिए आवेदन किया है तो रामपुर बाघेलान से 7 आवेदन आए हैं। इसके अलावा चित्रकूट से 3,अमरपाटन से 2, मैहर से 3 व सतना से 4 लोगों ने दावेदारी की। फिलहाल संगठन सिंबल व दूसरे दलों की टिकट बटने का इंतजार कर रहा है ताकि सपाक्स के दावेदारों के नाम फायनल किए जा सकें।
इन पर टिकी हैं नजरें
चुनावी मौसम में सभी नेता अपने-अपने दलों से टिकट मांग रहे हैं, लेकिन यह भी सच है कि टिकट किसी एक को ही मिल सकती है। ऐसी स्थिति में चुनावी रण में उतरने के इच्छुक पार्टी नेताओं के लिए सपाक्स एक बेहतर मंच हो सकता है। सपाक्स ने इसी के चलते जिले की सातों विधानसभा क्षेत्र पर नजरें गड़ा रखी हैं। सतना विधानसभा सीट पर भाजपा नेता पं. धर्मेश चतुर्वेदी, बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एड. मुरलीधर शर्मा, विजय तिवारी, पं. राजेश द्विवेदी के अलावा कांग्रेस नेत ा अजय कुमार सोनी संगठन के निशाने पर हैं। इसी प्रकार नागौद विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस नेता नागेश मिश्र के अलावा भाजपा नेता वीरेंद्र द्विवेदी व रमाशंकर शुक्ल बाबाजी पर भी सपाक्स डोरे डाल रहा है। मैहर में सपाक्स कांग्रेस नेता श्रीकांत चतुर्वेदी को उतारना चाहता है लेकिन श्रीकांत की टिकट लगभग पक्की होने के चलते वह दूसरे विकल्प पर गौर कर रहा है। रामपुर बाघेलान में कई कांग्रेसी और भाजपा नेताओं के सपाक्स पदाधिकारी संपर्क में है। रैगांव में सपाक्स के पास कई आवेदन आए हैं, लेकिन अभी कोई निर्णय नहीं हो सका है। इस संबंध में सपाक्स के शीर्ष पदाधिकारियों का कहना है कि जो सपाक्स की विचारधारा के साथ चलेगा उसके पीछे संगठन पूरी शिद्दत से खड़ा रहेगा।