मुर्गा-मुर्गी के खाने वाला अनाज सरकार ने लोगों में बांट दिया, रिपोर्ट में खुलासा

मुर्गा-मुर्गी के खाने वाला अनाज सरकार ने लोगों में बांट दिया, रिपोर्ट में खुलासा

लॉकडाउन के दौरान गरीबों को खाने के लिए दिया गया घटिया चावल

मंडला और बालाघाट से लिए गए थे सैंपल

भोपाल। कोरोना काल की शुरुआत में देशभर के साथ साथ मध्य प्रदेश में लगे लॉकडाउन के चलते सभी काम कारोबार बंद होने के कारण खासकर गरीबों पर भारी आर्थिक संकट आ गया था। ऐसे में प्रदेश सरकार के आदेश पर राशन दुकानों से चावल बांटा गया था। लेकिन, अब खुलासा हुआ है कि, वो चावल घटिया क्वालिटी का था। ये खुलासा केंद्र सरकार की ओर से जारी रिपोर्ट में हुआ है। लैब की रिपोर्ट में बताया गया है कि सभी सैंपल इंसानों के उपभोग करने योग्य नहीं थे, जो चावल सप्लाई किया गया वहां पोल्ट्री ग्रेड का था। केंद्र की रिपोर्ट के खुलासे के बाद प्रदेश में सियासत गरमा गई है। मप्र कांग्रेस ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा है कि राज्य सरकार ने कोरोना संक्रमण काल के दौरान गरीबों को घटिया चावल देने का काम किया है, जो कि जानवरों के खाने लायक था। कांग्रेस ने इस पूरे मामले में उच्चस्तरीय जांच की मांग कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। पीडीएस के तहत बांटा गया गरीबों में राशन केंद्र सरकार द्वारा प्रदेश सरकार को लिखे पत्र के जरिये बताया गया है कि, सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत सरकारी राशन दुकानों से गरीबों में बांटे गए चावल इंसानों के खाने लायक नहीं थे। वो पोल्ट्री ग्रेड चावल था, जो इंसानों को पीडीएस के तहत बांट दिया गया। केंद्र सरकार की ओर से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि, 30 जुलाई से 2 अगस्त के बीच में 32 सैंपल चावल के लिए गए थे। इसमें कुछ सैंपल वेयरहाउस और कुछ राशन दुकानों से लिए गए थे। इन्हें दिल्ली की सीजीएएल लैब में जांच के लिए भेजा गया था। कमलनाथ ने उठाए सवाल केंद्र की तरफ से भेजी गई चि_ी मीडिया में लीक हो गई है। पूर्व सीएम कमलनाथ ने इस पर निशाना साधते हुए कहा है कि एमपी में कोरोना महामारी में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत जिस चावल का वितरण किया गया है, वो मनुष्य के खाने के योग्य नहीं था। यह केंद्र सरकार के जांच के उपरांत लिखे गए पत्र के माध्यम से सामने आया है। यह इंसानियत और मानवता को तार-तार करने वाला एक आपराधिक कृत्य है। इसके दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो और सरकार इसके लिए प्रदेश की जनता से माफी मांगे। मंत्री ने जानकारी से इनकार किया वहीं, प्रदेश खाद्य आपूर्ति मंत्री बिसाहू लाल सिंह ने मीडिया से बात करते हुए चिट्टी के बारे में कोई जानकारी नहीं होना बताया है। साथ ही कहा है कि विभाग को अभी तक यह चि_ी नहीं मिली है। लेकिन इस रिपोर्ट से सरकार की फजीहत हो रही है। ऐसे में उम्मीद है कि दोषी अफसरों पर जरूर कार्रवाई की जाएगी। कांग्रेस ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग लैब की रिपोर्ट में सामने आया कि, सभी सैंपल इंसानों के खाने योग्य नहीं थे, सप्लाई किया गया चावल वहां पोल्ट्री ग्रेड का था। केंद्र की रिपोर्ट के खुलासे के बाद प्रदेश में सियासत गरमा गई है। एमपी कांग्रेस ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि, राज्य सरकार ने कोरोना संक्रमण काल के दौरान गरीबों को घटिया चावल देने का काम किया है, जो कि जानवरों के खाने लायक था। कांग्रेस ने इस पूरे मामले में उच्चस्तरीय जांच की मांग कर दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की है। भ्रष्टाचार के आरोप कांग्रेस नेता भूपेंद्र गुप्ता के मुताबिक, चावल वितरण मामले में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और गड़बड़ी सामने आई है। ऐसे में प्रदेश सरकार को अब जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करनी चाहिए और साथ ही यह बताना चाहिए कि पूरे प्रदेश में कहां कहां पर पोल्ट्री ग्रेड का चावल का वितरण किया गया है। वहीं, भाजपा ने भी इसपर जवाबी हमला बोलते हुए राशन दुकान से गरीबों को पोल्ट्री ग्रेड का चावल बांटे जाने के कांग्रेस के आरोपों पर कहा कि, बीते 15 महीने में कांग्रेस सरकार के समय का ये पूरा मामला है। पिछली कांग्रेस सरकार ने भंडारण से लेकर राशन वितरण तक की व्यवस्था की थी, जिसमें सच अब खुलकर सामने आया है। इस पूरे मामले में भाजपा राज्य सरकार से उच्च स्तरीय जांच की मांग करेगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।