प्रदेश में दूसरी पंक्ति और युवाओं को मिला मौका
डा आनंद शुक्ल
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान के बहुप्रतिक्षित मंत्रीमंडल विस्तार हो जाने के बाद अब इस बात की चर्चाआं का दौर शुरू हो गया है कि इसमें किस क्षत्रप का कितना दबदबा रहा। स्वाभाविक रूप से सरकार के गठन में अहम भूमिका निभाने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थकों को ज्यादा स्थान मिलना तय था।इसके बाद क्षेत्रीय और जातीय संतुलन बनाए रखना सरकार के लिए चुनौती थी जिसे समय रहते संगठन ने आग बढकर संभाल लिया। यही कारण है कि सीएम शिवराज के इस कैबिनेट विस्तार में अन्य किसी क्षत्रप की नहीं बल्कि संगठन खासकर केंद्रीय नेतत्व के इशारे पर ही सारे चेहरे तय किये गये।यही कारण है कि मंत्रीमंडल विस्तार के बाद कहीं से किसी प्रकार की कोई आवाज नहीं आयी। इंदौर में जरूर मेंदोला समर्थक ने अपनी प्रतिक्रिया सडक पर उतरकर व्यक्त की।

दरअसल भाजपा में कोई नेता या व्यक्ति नहीं बल्कि संगठन सर्वोपरि होता है। यही कारण है कि भाजपा में अनुशासन बना रहता है और एक बार जो तय हो गया वो पार्टी कार्यकर्ताओं तक लक्ष्मण रेखा बनकर पहुंच जाती है। यह बात देश के अन्य किसी राजनीतिक दल में देखने को नहीं मिलती।गौर करने वाली बात यह है कि इस मंत्रीमंडल विस्तार के माध्यम से भाजपा संगठन ने एक ओर जहां अनुशासन को सर्वोपरि सिद्ध किया है वहीं दूसरी ओर मप्र की सिंयासत को लेकर आने समय की दशा और दिशा कैसी होगी,इसकी रूपरेखा का संकेत भी दे दिया।चंबल को लेकर यदि थोडा अतीत में झाकें तो पता चलता है कि प्रदेश की राजनीति में कई ऐसे अवसर आए जब यहां का दबदबा देखने को मिलता रहा है। अब मौजूदा समय में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ,प्रदेशअध्यक्ष वीडी शर्मा ,ज्योतिरादित्य सिंधिया और प्रभात झा जैसे कद्वावर नेता भी इसी चंबल संभाग से आते हैं। ऐसे में स्वाभाविक तौर पर आने वाले राजनीतिक समय में कई बार इस प्रकार के अवसर देखने को मिलेंगे।
विन्ध्य में दिखा अनुशासन: अपनी राजनीतिक चेतना के लिए पहचाने जाने वाले विन्ध्य के कार्यकर्ताओं में अनुशासन साफतौर पर देखने को मिला। हालांकि इसी संभाग से दो मंत्री बिसाहूलाल और रामखेलावन पटेल बनाए गए हैं किंतु सदन में अधिक सीटें भेजने वाले विंन्ध्य के कार्यकर्ताओं की अपेक्षाएं कुछ और थीं। अब संभावना इस बात पर टिकी है कि आने वाले समय में प्रदेश की राजनीतिक स्थितियां कैसी होंगी। तब तक विंन्ध्य और महाकौशल को केवल अपनी राजनीतिक धैर्यता का परिचय देना होगा। हालांकि इस बात की संभावना हो सकती है कि विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले विंध्य की झोली में विधानसभा अध्यक्ष का पद भी आ सकता है।