दिल व फेफड़े पर था 3.5 किलो का ट्यूमर, डॉक्टरों ने ऐसे बचाई जान

रायपुर। 
एडवाइंस कॉर्डियक इंस्टीट्यूट (एसीआइ) के डॉक्टर्स ने एक बार फिर जटिलतम सर्जरी कर 30 साल के युवा की जान बचा ली। मेडिएस्टिनल ट्यूमर ठीक हार्ट के ऊपर था। हार्ट के साथ-साथ लंग्स को भी दबाते चले जा रहा था। 3.5 किलो के इस स्ट्यूमर को अगर समय रहते न निकाला जाता तो संभव था कि यह हार्ट की पंपिंग रोक देता, मरीज की जान भी चली जाती। डॉक्टर्स इस बात को लेकर उत्साहित हैं कि मरीज पूरी तरह से स्वस्थ्य है। ऐसे केस में कई बार एक अंग में लकवा होने की आशंका होती है। हार्ट और लंग्स पूरी तरह से सुरक्षित हैं।

कॉर्डियक थोरोसिक सर्जन डॉ. केके साहू ने  जानकारी देते हुए बताया कि निशांत (बदला हुआ नाम) 15 दिन पहले ओपीडी में आया था। उसके पास जगदलपुर के अस्पताल में हुई सीटी स्कैन की रिपोर्ट थी, जिससे स्पष्ट था कि हार्ट के ऊपर ट्यूमर है।

दोबारा किसी भी डायग्नोस की आवश्यकता नहीं पड़ी। करीब चार घंटे चली सर्जरी के बाद हमने राहत की सांस ली। सर्जरी के दौरान कोई कॉम्प्लीकेशन नहीं हुआ। बतां दें कि निशांत ऑफिसर ग्रेड के सरकारी कर्मचारी हैं। इस सर्जरी में डॉ. साहू, उनकी कॉर्डियोथोरोसिक विभाग की टीम के साथ-साथ एनेस्थियोलॉजिस्ट डॉ. ओपी सुंदरानी भी थे।

 
हाथ में लगातार दर्द बने रहना, सांस फूलना हार्ट में या उससे संबंधित कोई रोग हो सकता है। निशांत को ये दोनों ही परेशानियां थीं। उन्हें जगदलपुर के डॉक्टर्स ने सीधे एसीआइ रेफर कर दिया। यहां पर काबिल डॉक्टर्स तो हैं ही, बस ओपन हार्ट सर्जरी के लिए उपकरणों की सख्त जरूरत है।

पांच किलो तक का ट्यूमर निकाल चुके हैं

एसीआइ के कॉर्डियोथोरोसिक सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. केके साहू के नेतृत्व में बीते दो महीने में तीन बड़ी कॉर्डियक सर्जरी हो चुकी हैं। सबसे पहले पांच किलो, 2.5 किलो के मेडिएस्टिनल ट्यूमर का ऑपरेट किया जा चुका है।