नर्मदा की मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमाएं उपलब्ध कराएगा गायत्री परिवार

भोपाल
 गणेश चतुर्थी आने में अब महज एक सप्ताह बाकी है। ऐसे में कलाकार भगवान गणेश जी की प्रतिमाएं तैयार करने में जुट गए हैं। 13 सितंबर को घर-घर में गजानन विराजमान किए जाएंगे। ऐसे में मिट्टी के गणपति बनाने के लिए विभिन्न सामाजिक संगठन भक्तों को ट्रेनिंग दे रहे हैं। अखिल विश्व गायत्री परिवार ने भी लोगों को मिट्टी के गणपति उपलब्ध कराने की बीड़ा उठाया है।

एमपी नगर स्थित गायत्री शक्तिपीठ में लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरुक करने के लिए मिट्टी से गणपति बनाने का प्रशिक्षण लोगों को दिया जा रहा है। गायत्री परिवार के प्रवक्ता अशोक नेमा ने बताया कि किसी भी प्रकार के केमिकल से रहित, नर्मदा नदी की मिट्टी से बनी इन मूर्तियां को श्रद्धालुओं को उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही लोगों से पर्यावरण संरक्षण के लिए पीओपी की मूर्तियों के बजाय ईकोफ्रेंडली मिट्टी की मूर्तियां ही विराजमान कराने की अपील की जाएगी। नर्मदा नदी की मिट्टी से बनी इन मूर्तियों को श्रद्धालु गायत्री शक्तिपीठ से प्राप्त कर सकते हैं। वहीं व्यापारी वर्ग को भी मूर्तियां उपलब्ध कराने की बात गायत्री परिवार के सदस्यों ने कही है।

मिट्टी की प्रतिमाएं सबसे पवित्र

ब्रह्म ज्योतिष संस्थान के ज्योतिषाचार्य पं. जगदीश शर्मा ने बताया कि शास्त्रों के मुताबिक मिट्टी को सबसे अधिक पवित्र माना जाता है। ऐसे में मिट्टी के गणपति की घरों व झांकियों में स्थापित करना विशेष फलदायी है। पं. शर्मा का कहना है कि पीओपी की प्रतिमाएं पूजा योग्य नहीं होती। क्योंकि इसमें कई तरह के केमिकलों व जहरीले रंगों का इस्तेमाल किया जाता है। पीओपी की मूर्तियां पर्यावरण को प्रदूषित करती हैं, क्योंकि तालाबों में विसर्जन के बाद यह घुलती नहीं। वहीं केमिकल पदार्थों के प्रभाव से जलीय जीव मर जाते हैं।