पारम्परिक जल स्रोतों को संरक्षित कराएगी उत्तर प्रदेश की सरकार

पारम्परिक जल स्रोतों को संरक्षित कराएगी उत्तर प्रदेश की सरकार

 गोरखपुर
 
वर्षा के जल के संचयन और भूमिगत जल के दोहन को रोकने के लिए प्रदेश सरकार अभियान चला रही है। इस कड़ी में मनरेगा से जोड़ कर तालाबों एवं प्राकृतिक जल स्त्रोतों का सृजन और संरक्षण पर खासा जोर है लेकिन अदूरदर्शी तरीकों के कारण शासन को सही परिणाम नहीं मिल पा रहा है। यही वजह है कि प्रमुख सचिव ने शुक्रवार को विस्तृत दिशा निर्देश जारी कर तालाबों के संरक्षण के कार्य यथाशीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। 
पहल
मनरेगा के तहत पारम्परिक जल स्रोतों व तालाबों का होगा संरक्षण
संरक्षण में तकनीक का अभाव एवं अदूरदर्शिता नहीं होने दी जाएगी
प्रमुख सचिव ने तालाबों के निर्माण एवं संरक्षण को दिए दिशा निर्देश

वर्षा जल संरक्षण को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ काफी संवेदनशील हैं। उनकी इच्छा के मुताबिक ही वित्तवर्ष 2018-19 में तालाब निर्माण के लिए निर्धारित लक्ष्य 20827 के सापेक्ष 20922 तालाब पूर्ण किए जाने की प्रदेश सरकार को जानकारी सभी जिलों से प्रेषित की गई। प्रमुख सचिव ने पाया कि शासन स्तर पर तमाम दिशा निर्देश दिए जाने के बाद भी अदूरदर्शी तरीके से तालाबों के के निर्माण किए गए। लिहाजा जल संचयन हुआ, न भूगर्भ जल रिचार्ज हुआ, पशुओं और मत्स्य पालन की संभावनाएं भी कुप्रभावित हुई। लिहाजा नए सिरे से गाइड लाइन जारी कर जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि अनुपालन सुनिश्चित कराएं। 

तालाब निर्माण और जीर्णोद्धा स्थल के चयन में रखे ध्यान
जहां भूमिगत जल 8 मीटर या कम है, वहां तालाब निर्माण की जरूरत नहीं, पुराने तालाबों का जीर्णोद्धार किया जाए। जहां भूमिगत जल 8 मीटर से अधिक है, वहां नए तालाब का निर्माण करें। ऐसे तालाबों में रिचार्ज शाफ्ट का निर्माण भी करें। लेकिन पठारी क्षेत्रों में रिचार्ज शाप्ट की जरूरत नहीं है। तालाब के कैचमेंट एरिया में कम से कम तीन चौथाई भाग में जंगल अथवा वनस्पति का होना अपरिहार्य है। इससे न केवल मिट्टी की कटान रुकेगी, सिल्टेशन की समस्या पर भी अंकुश लगेगा। खुदे हुए तालाब अर्द्धवृताकार -आयताकार बनाएं। तालाब का ढाल सामान्यता 2:1 एवं पशुओं के गुजरने के स्थल पर ढाल 4: 1 रखें। आबादी के निकट के तालाब में पक्का घाट बनाए। मवेशियों के पानी पीने के लिए घाट बनाए, बेंचों का अनिवार्य निर्माण करें ताकि उनका उपयोग किया जा सके। 

तालाब में जैविक विविधता के लिए पौधारोपण आवश्यक
तालाबों में जैविक विविधता के लिए वृक्षारोपण किया जाना चाहिए। मुख्य वन संरक्षक आर हेमंत कुमार के मुताबिक यहां जल वर्धक प्रजाति एवं जल शोधक प्रजाति के पौधे लगाने चाहिए। जैसे आम, अमलताश, जामुन, इमली, पीपल, बेल, बरगद, आंवला, शहतूत, खैर, गूलर, पाकड़, बांस, केला, अमरुद आदि। तालाब के पश्चिम एवं दक्षिण दिशा में सघन पौधारोपण किया जाना चाहिए। इससे वाष्पीकरण कम होगा, छाया भी मिलेगी। मिट्टी क्षरण रोकने के लिए दूब, सतावर, पुदिना, पिपरमिंट, वन तुलसी, मकोय, चिरौता, सोमलता, गुलाब, गिलोय, ब्रह्मकमल के पौधे लगाने चाहिए। 

सुनियोजित ढंग से करें पौधारोपण
तालाब के किनारे पौधारोपण कार्य सुनियोजित ढंग से किया जाना चाहिए। ऐसे तलाबा जहां 5 मीटर से कम की पट्टी हो, 3 गुना 3 मीटर की दूरी पर पौधे लगाने चाहिए। बरगद, पीपल के लिए यह दूसरी 12 मीटर, आम के लिए 9 मीटर रखनी चाहिए। जहां 5 मीटर से अधिक भूमि हो वहां, बहुपंक्ति में पौधारोपण करना चाहिए।