पुरखों के हुनर और परम्परागत व्यवसाय को सहेज रहे कुम्हार

पुरखों के हुनर और परम्परागत व्यवसाय को सहेज रहे कुम्हार

रायपुर
छत्तीसगढ़ सरकार की जनहितैषी नीतियों तथा यहां की कला और संस्कृति के संरक्षण व संवर्धन का ही सार्थक परिणाम है कि लोगों में आज उत्साह दिखायी दे रहा है। खेती-किसानी से लेकर परम्परागत व्यवसाय को बल मिला है। आधुनिकता के इस दौर में विलुप्त होती टेराकोटा कला को फिर से छत्तीसगढ़ में जीवंत हो उठी है। कुम्हारी के परम्परागत व्यवसाय से दूर हो रहे कुम्हार फिर से अपने हुनर को तराशने और अपने पुरखों के व्यवसाय को आगे बढ़ाने में जुट गए है। मुख्यमंत्री भूपेश बधेल की मंशा के अनुरूप माटीकला बोर्ड ने कुम्हारों को विभिन्न प्रकार की सहायता देकर उन्हें उनके परम्परागत व्यवसाय से जोड?े में जुटा हैं।       

ग्रामोद्योग मंत्री गुरु रूद्रकुमार का कहना है कि माटीकला बोर्ड द्वारा संचालित योजनाओं के माध्यम से कुम्हारों के आर्थिक और सामाजिक उत्थान के लिए बेहतर प्रयास किए जा रहे हैं। उनके हुनर और परंपरागत व्यवसाय को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक ले जाने में सरकार हर संभव मदद कर रही है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशा के अनुरूप ग्रामोद्योग विभाग गांव में ग्रामोद्योग एवं माटीकला बोर्ड के माध्यम से ग्रामीणों को रोजगार व्यवसाय से जोड?े और उन्हें स्वावलंबी बनाने में अहम् भूमिका अदा कर रहा है। ग्रामीणों के परम्परागत व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें आवश्यक मार्गदर्शन एवं मदद भी दी जा रही है।

राज्य के कुंभकारों की आर्थिक स्थिति में सुधार करने की पहल छत्तीसगढ़ माटीकला बोर्ड ने की है। बोर्ड द्वारा संचालित कुंभकार टेराकोटा योजना, ग्लेजिंग यूनिट की स्थापना, कुंभकारों का पंजीयन, माटीशिल्पिओं को प्रशिक्षण और डिजाईन विकास योजना, माटीशिल्पिओं को हस्तचलित रिक्शा ठेला प्रदाय और माटीशिल्पिओं को ह्यअध्ययन यात्रा योजना जैसी संचालित कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से कुंभकारों को लाभान्वित किया जा रहा है। यही वजह है कि आज कुम्हार पूरे उत्साह से अपने परम्परागत व्यवसाय से जुड़कर बेहतर जीवन की ओर अग्रसर होने लगे हैं। उनके इस काम में परिवार के अन्य सदस्य भी बराबर की भागीदारी निभा रहे हैं।