प्लास्टिक की बोतल से कैंसर होने के नहीं मिले पुख्ता सबूत: WHO

प्लास्टिक की बोतल से कैंसर होने के नहीं मिले पुख्ता सबूत: WHO

माइक्रोप्लास्टिक की मौजूदगी पीने के पानी में तेजी से बढ़ती जा रही है, लेकिन प्लास्टिक की बोतल में पानी पीने से कैंसर होता है, इसके अभी तक पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं। हालांकि इसके साथ ही इस विषय पर WHO की ओर से जारी नई रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि प्लास्टिक का कम इस्तेमाल करना चाहिए, ताकि कम प्रदूषण हो। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार प्लास्टिक पर्यावरण में फैलकर किस तरह शरीर को प्रभावित करता है, इसे समझने के लिए और ज्यादा रिसर्च की जरूरत है।

5 मिमी से कम आकार वाले होते हैं माइक्रोप्लास्टिकमाइक्रोप्लास्टिक की कोई निश्चित परिभाषा नहीं है, लेकिन WHO के अनुसार माइक्रोप्लास्टिक प्लास्टिक के बहुत छोटे अंश या रेशे होते हैं, जिनका आकार सामान्यत: 5 मिमी से कम होता है। हालांकि पीने के पानी में यह कण 1 मिमी जितने छोटे भी हो सकते हैं। वास्तव में 1 मिमी से छोटे कणों को नैनोप्लास्टिक कहा जाता है।
हर जगह हो चुकी है प्लास्टिक की घुसपैठ

        प्लास्टिक शीशी में दवाएं कितनी सेफ?
    प्लास्टिक शीशी में होम्योपैथिक दवाएं सेफ होती हैं, बशर्ते शीशी लूज प्लास्टिक की न बनी हों। वैसे, कांच की शीशी में होम्योपैथिक मेडिसिंस रखी हों तो बेहतर रहेगा, क्योंकि इसमें किसी भी तरह का शक-सुबहा नहीं रह जाता। यह नियम एलोपैथिक दवाओं खासकर सिरप आदि पर भी लागू होता है। प्लास्टिक से बने इंजेक्शन, आईवी आदि के नुकसान के बारे में अभी कोई रिपोर्ट सामने नहीं आई है।

    बच्चों को प्लास्टिक से बचाएं
    - बच्चे को फीड करने के लिए प्लास्टिक बॉटल का इस्तेमाल न करें। इसकी जगह स्टील या कांच की बॉटल यूज करें। अगर प्लास्टिक की बॉटल यूज करना ही है तो अच्छी क्वॉलिटी की लें। बॉटल के ऊपर BFA फ्री या BFR फ्री या लेड फ्री आदि लिखा हो तो बेहतर है।- प्लास्टिक बॉटल को माइक्रोवेव या गैस पर पानी में बिल्कुल न उबालें। बॉटल को गर्म पानी से साफ करना काफी है। इसके अलावा क्लोरीन सलूशन से साफ कर सकते हैं। इससे सारे किटाणु निकल जाते हैं।- सेंटर फॉर साइंस ऐंड