राजस्थान के चुनाव नतीजे से फिर से बन रही है 2008 जैसी स्थिति
जयपुर
राजस्थान में कांग्रेस मौजूदा सत्तारूढ़ पार्टी बीजेपी से निर्णायक बढ़त ले चुकी है और अब सवाल सिर्फ यह बचा है कि वह अपने बल पर बहुमत हासिल कर पाती है या नहीं। अभी तक के रुझानों में कांग्रेस 98 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि 5 जीत चुकी है। बीजेपी 64 सीटों पर आगे चल रही है , जबकि 6 सीटें जीत चुकी है। तीसरी ताकत के रूप में बीएसपी बढ़ती दिख रही है , जो पांच सीटों पर आगे चल रही है, जबकि एक जीत चुकी है। राजस्थान में कुल 200 विधानसभा सीटें हैं , लेकिन एक सीट पर मतदान अभी नहीं हुआ है। इसलिए 199 सीटों के आधार पर ही बहुमत का फैसला होगा।
राजस्थान विधानसभा चुनाव की मतगणना से अभी तक जो रुझान मिल रहे हैं उससे वर्ष 2008 की स्थिति रिपीट होती दिख रही है। 10 साल पहले हुए चुनाव में कांग्रेस को 96 सीटों पर जीत मिली थी और बीजेपी के खाते में 78 सीटें गई थीं। बीएसपी उस समय भी 6 सीटें जीतने में सफल रही थी। मौजूदा यानी 2018 विधानसभा चुनाव परिणानों की बात करें तो अब तक रुझानों के आधार पर तस्वीर फिलहाल इसी के आसपास बनती दिख रही है।
उस समय भी कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष सी पी जोशी और अशोक गहलोत मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार थे। सीपी जोशी एक वोट से चुनाव हार गए थे लेकिन अंत तक मुख्यमंत्री पद की दावेदारी पेश करते रहे थे। दिग्विजय सिंह को कांग्रेस पर्यवेक्षक बनाकर भेजा गया था और 'विधायकों की पसंद' के आधार पर अशोक गहलोत उस समय मुख्यमंत्री चुने गए थे। 10 साल बाद एक बार फिर मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट और अशोक गहलोत मुख्यमंत्री पद के लिए आमने -सामने हैं।
सचिन पायलट चार साल से भी ज्यादा समय से राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हैं , वहीं अशोक गहलोत पार्टी के ताकतवर महासचिव हैं। दोनों के समर्थक नतीजे घोषित होने से पहले से ही अपने -अपने नेता को मुख्यमंत्री बनाने के लिए लामबंद हो रहे हैं। ऐसे में यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि दोनों के झगड़े में किसी तीसरे के सिर सेहरा न बंध जाएं। ऐसे में यह तीसरी सी पी जोशी या कोई अन्य हो सकता है।
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