सरकार कैसे पूरा होगा गौशाला का वादा?
भोपाल
मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आने से पहले हर मंडल में गो अभयारण्य का वादा किया था। सत्ता में आए हुए कांग्रेस सरकार को छह महीने होने वाले हैं। लेकिन इस दिशा में सरकार ने फिलहाल कोई खास कदम नहीं उठाया। वहीं, मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश की 22 हज़ार पंचायतों में चारागाह नहीं होने से सरकार के इस वादे पर प्रशनचिन्ह लग रहे हैं। गौशालाओं के लिए चारागाह नहीं होने से सवाल उठ रहे हैं कि अगर सरकार गौशलाओं का निर्माण करवा भी देती है तो वह कैसे बिना चारागाह के चल पाएंगी। सीएम कमलनाथ की सभी पंचायतों में गौशालाएं स्थापित करने की महत्वाकांक्षी योजना को चरगाह (चारागाह) की एक रिपोर्ट के बाद बड़ा झटका लगा है, जिसमें कहा गया है कि कुल 22814 ग्राम पंचायतों में से केवल 453 में मवेशियों के लिए चारागाह है।
पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग को चारागाह पर एक डिटेल रिपोर्ट इस महीने भेजी गई है। चारागाह के अलावा रिपोर्ट में पानी और बिजली की स्थिति को भी दर्शाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक 453 पंचायत में सिर्फ 500 चारागाह हैं। इन 500 में से 145 में बिजली उपलब्ध है। जबकि शेष 355 चारागाह में भारी बिजली की समस्या है। इसके अलावा पानी को उपलब्धता को लेकर भी रिपोर्ट में बड़ा खुलासा किया गया है। 169 चारागाह में पानी की उपलब्धा है। जबिक 331 में पानी की भारी समस्या है। माह जून में पूरे राज्य में विशेष ग्राम सभाओं के आयोजन के बाद चरागाहों, बिजली और पानी की उपलब्धता का दस्तावेजीकरण किया गया। बाद में इन रिपोर्टों को ब्लॉक, तहसील और जिला स्तर पर संकलित किया गया, जिसे अंतत: राज्य स्तर पर पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग द्वारा संकलित किया गया। रिपोर्ट में चरागाहों के लिए एकड़ में भूमि की उपलब्धता का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में चरागाहों से विद्युत ट्रांसफार्मर की दूरी भी शामिल है जो बिजली कनेक्शन प्रदान करने की अनुमानित लागत के साथ-साथ बिजली से भी परे हैं।
पंचायत विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 563 पंचायतों में 632 गौशालाएं संचालित हो रही हैं। प्रदेश की 22,182 पंचायतों में गौशाला नहीं हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 632 गौशालाओं में से सिर्फ 178 में बिजली कनेक्शन मौजूद है जबकि 454 बिना बिजली के संचालित हो रही हैं। नाम गुप्त रखने की शर्त पर एक अफसर ने बताया कि सरकार की इस योजना को अमलीजामा पहनाना लगभग नामुमकिन है। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में एक भी सरकारी गौशाला नहीं है जिसपर सरकार का सीधा नियंत्रण हो. यही वजह है कि चुनाव के वक्त दिए गए वचनपत्र में से कांग्रेस का एक वचन सरकारी गौशालाओं का निर्माण करना भी था।
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