अजीत डोभाल के प्लान से पीछे जाएगी चीनी सेना?, लद्दाख में 8 हफ्ते से तनाव
नई दिल्ली
लद्दाख में भारत और चीन के बीच विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। चीन को हरकतों से बाज न आता देख अब सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को यह जिम्मेदारी सौंप सकती है। देखना होगा कि पाकिस्तान को कई बार अपने प्लानों से पटखनी दे चुके डोभाल अब ड्रैगन को कैसे शांत करेंगे। मिली जानकारी के मुताबिक, सरकार स्पेशल रीप्रिजेंटेटिव (SR) तंत्र से बॉर्डर मुद्दा सुलझाने पर विचार कर रही है। इसमें अजीत डोभाल और चीन में उनके समकक्ष वांग यी के बीच बातचीत होगी। वांग यी इस वक्त चीन के विदेश मंत्री होने के साथ-साथ स्टेट काउंसलर भी हैं। इस पद की पॉवर विदेश मंत्री से ज्यादा होती है। सरकार मानती है कि इससे चीन की सेना को पीछे हटने पर राजी किया जा सकता है।
भारत समेत एशिया में पड़ोसी देशों के साथ चीन की बढ़ती दादागिरी को देखते हुए अमेरिका ने ड्रैगन से मुकाबले के लिए कमर कस ली है। अमेरिका अपने हजारों सैनिकों को जापान से लेकर ऑस्ट्रेलिया तक पूरे एशिया में तैनात करने जा रहा है।
लद्दाख मामले पर पहले से ऐक्टिव डोभाल
लद्दाख संकट पर डोभाल पहले से ऐक्टिव हैं और चीन की हर हरकत पर उनकी नजर भी है। बताया जाता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जो लद्दाख जाने का अचानक प्लान बना वह डोभाल की रणनीति का हिस्सा था। डोभाल के प्लान की वजह से ही किसी को भी इसकी भनक नहीं लगी थी। दूसरी तरफ चीनी घुसपैठ की कोशिश के बाद जिस तरह भारत ने आक्रमक तरीके से उसका जवाब दिया उसे भी डोभाल की रणनीति बताया जाता है।
दूसरी तरफ बॉर्डर पर दोनों देशों के बीच सेन्य कमांडर स्तर की बातचीत भी जारी है। इस सबके बीच भारत बातचीत को और ऊंचे स्तर तक उठाना चाहता है। विदेश मंत्रियों के बीच भी बातचीत चल रही है, लेकिन अब भारत वहां ऊंचे स्तर तक इस बात को लेकर जाना चाहता है। चीन में 2017 तक विदेश मंत्री और स्टेट काउंसलर पद पर अलग-अलग लोग होते थे। लेकिन साल 2018 के बाद दोनों पद पर एक ही शख्स होता है। 2017 में जब डोकलाम विवाद हुआ था तो स्टेट काउंसलर पद पर यांग जिएची थे। चीन ने उन्हें स्पेशल रीप्रिजेंटेटिव बनाया था।
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