कोटा का शिव मठ मंदिर, चंद्रेसल होगा संरक्षित: उप मुख्यमंत्री
जयपुर। उप मुख्यमंत्री एवं कला, साहित्य, संस्कृति और पुरातत्व मंत्री श्रीमती दिया कुमारी ने गुरुवार को विधानसभा में कहा कि कोटा का शिव मठ मंदिर, चंद्रेसल 10वीं-11वीं शताब्दी का मंदिर है। राज्य सरकार शीघ्र ही प्राथमिकता से इस मंदिर के संरक्षण संबंधी कार्य करेगी। उन्होंने कहा कि पूर्व में शिव मठ मंदिर, चंद्रेसल के शिखर का कार्य मैचिंग पत्थर नहीं मिलने के कारण नहीं करवाया जा सका था। उन्होंने आश्वस्त किया कि इस स्मारक का संरक्षण व विकास कार्य विशेषज्ञों की देख-रेख में पूर्ण सावधानी और उच्चगुणवक्तायुक्त सामग्री से ही करवाया जाएगा।
उप मुख्यमंत्री प्रश्नकाल के दौरान सदस्य श्रीमती कल्पना देवी द्वारा इस संबंध में पूछे गए पूरक प्रश्नों का जवाब दे रही थीं। उन्होंने कहा कि शिव मठ मंदिर, चंद्रेसल को पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग द्वारा वर्ष 2008 में संरक्षित किया गया था। उन्होंने बताया कि इस मठ एवं मंदिर में सभा मंडप का जीर्णोद्धार कार्य, फर्श, सैंडस्टोन फ्लोरिंग, लाइम प्लास्टर, शौचालय सुविधा, डस्टबिन, पाथ-वे, प्लिंथ प्रोटेक्शन, स्टोन बेंच इत्यादि कार्य करवाए गए थे।
इससे पहले विधायक श्रीमती कल्पना देवी के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में उप मुख्यमंत्री ने बताया कि विधानसभा क्षेत्र लाडपुरा में कला एवं पर्यटन की दृष्टि से स्मारक तथा सांस्कृतिक दृष्टि से कोई सर्वे नहीं करवाया गया है। उन्होंने बताया कि कला, साहित्य, संस्कृति और पुरातत्व विभाग द्वारा चट्टानों पर उत्कीर्ण शैलचित्र (अलानियां), शिव मठ मंदिर, चन्द्रेसल तथा मंदिर समूह, मानस गांव को संरक्षित स्मारक घोषित किया गया है।
उन्होंने बताया कि पुरातत्व महत्व में संरक्षित चन्द्रेसल मठ की छतरियों के जीर्णोद्धार, मरम्मत की वर्तमान में कोई कार्य योजना विचाराधीन नहीं है।
उन्होंने बताया कि विभाग में बजट उपलब्धता तथा कार्य प्राथमिकता के आधार पर युक्तियुक्त निर्णय लिया जाकर जीर्णोद्धार एवं मरम्मत के कार्य करवाये जाते हैं, तथापि शिव मठ मंदिर, चन्द्रेसल पर पूर्व में वित्तीय वर्ष 2017-18 और 2018-19 में विभाग द्वारा 154.00 लाख रूपए की राशि के संरक्षण व विकास कार्य सम्पादित करवाए गए हैं। उन्होंने इसका विवरण सदन के पटल पर रखा।
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