उच्च शिक्षा विभाग के अफसरों ने जताई नाराजगी
ग्वालियर
सरकारी महाविद्यालयों में स्ववित्तीय व स्वशासी मदों के तहत अलग-अलग पदों पर रखे गए दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों का ईपीएफ(एम्पलॉई प्रोवीडेंट फंड) जमा करने में मनमर्जी चलाने वाले प्राचार्य सवालों के घेरे में आ गए हैं।
ऐसे प्राचार्यों की कार्यशैली पर उच्च शिक्षा विभाग के आला अफसरों ने कड़ी नाराजगी जताई है। उन्हें चेतावनी दी गई है जिन प्राचार्यों ने दैवेभो कर्मियों की ईपीएफ राशि जमा करने के निर्देशों का पालन नहीं किया है,उनके कॉलेज में किसी देवेभो कर्मी के साथ अप्रिय स्थिति निर्मित हुई तो प्राचार्य का ही उत्तरदायित्व होगा। विभाग के इस आदेश के बाद प्राचार्यों में खलबची मच गई है। अभी तक जो ईपीएफ जमा करने में लापरवाही बरत रहे थे, उन्होंने दैवेभो कर्मियों का ईपीएफ कटौत्रा का निकालने में जुट गए हैं।
अनिवार्य है इपीएस कटौत्रा
भारत सरकार द्वारा जारी एम्प्लॉई प्रोवीडेंट फंड और मिसलेनियस प्रोवीजन एक्ट 1952 के तहत दैनिक श्रमिकों के लिए ईपीएफ कटौत्रा करना अनिवार्य है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन एवं रोजगार मंत्रालय भारत सरकार द्वारा समय-समय पर इस संबंध में सभी शासकीय विभागों सहित निजी क्षेत्र की कंपनी, संस्थाओं, फर्मों, उद्योगों के लिए आदेश जारी किए जाते हैं। इसी के तहत उच्च शिक्षा विभाग ने सारे कॉलेजों को दैवेभो श्रमिकों का ईपीएफ काटने के निर्देश दिए थे। विभाग के अफसरों के संज्ञान में यह बात आई है कि कई कॉलेज ऐसे हैं,जहां पर ईपीएफ नहीं काटा जा रहा।
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