कमलनाथ की कैबिनेट में क्या बड़ा दांव ज्योतिरादित्य सिंधिया का होगा

कमलनाथ की कैबिनेट में क्या बड़ा दांव ज्योतिरादित्य सिंधिया का होगा

कमलनाथ के बारे में कहा जाता है कि वे राजनीति में बड़ा दिल रखते हैं. अपने विरोधियों को साधना उनकी खूबियों में शुमार है. लेकिन मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बनने के बाद मंत्रिमंडल बनाना और सारे गुटों को साधना उनके लिए इतना आसान नहीं है. दिल्ली में कमलनाथ मंत्रिमंडल गठन को लेकर कवायद जारी है. कांग्रेस के सभी गुटों के नेताओं ने अपनी अंदरूनी दावेदारी शुरू कर दी है. ख़ास नज़र मध्यप्रदेश के चुनावी कैंपेन की कमान संभालने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया पर है.

दिग्गज मैदान में
माना जा रहा है कि कमलनाथ कैबिनेट में ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे का दबदबा होगा. दिग्विजय सिंह, के समर्थक भी ख़ास जगह लेंगे. वहीं चुनाव हार चुके सुरेश पचौरी, अजय सिंह, अरुण यादव और राहुल गांधी की कोर टीम में दख़ल रखने वाली मीनाक्षी नटराजन भी अपने-अपने समर्थकों के लिए ताकत लगाएंगे. प्रदेश के आदिवासी नेता कांतिलाल भूरिया के बेटे चुनाव हार गए हैं. वहीं पूर्व मंत्री नरेंद्र नाहटा, सुभाष सोजतिया की हार ने भी कमलनाथ की कैबिनेट में वजनदार नेताओं को कम कर दिया है. चार निर्दलीय जो चुनाव जीत कर आए हैं. वे कांग्रेस से हैं और उन्हें फिर से पार्टी में शामिल कर लिया गया है. उनमें से सुरेंद्र सिंह ठाकुर ने पूर्व मंत्री अर्चना चिटनिस को हराया है. कमलनाथ को अब इन्हें भी राजनीतिक समीकरण में साधना होगा.

सिंधिया खेमे का दबाव
इन तमाम गुटों और नेताओं के बीच सबसे बड़ा दांव ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे का होगा. कमलनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद सिंधिया समर्थकों ने दिल्ली में जिस तरह सिंधिया को प्रदेश अध्यक्ष बनाने या डिप्टी सीएम बनने की मांग कर अघोषित धरना दिया था वो बताता है कि ये खेमा कमलनाथ कैबिनेट में अपनी ताकतवर हिस्सेदारी के लिए पहला दांव खेल चुका है. सिंधिया ग्वालियर चंबल के साथ ही मालवा क्षेत्र में भी अपने समर्थकों के लिए दबाव बना सकते हैं.

जयवर्धन सबसे आगे
प्रदेश में कांग्रेस को एकजुट कर कमलनाथ के लिए परदे के पीछे रहकर काम करने वाले वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के सबसे ज्यादा समर्थक चुनाव जीते हैं. साथ ही दो बार के विधायक हो चुके उनके बेटे जयवर्धन सिंह कांग्रेस की युवा ब्रिगेड का नेतृत्व करते हैं. ऐसे में उनका मंत्री बनना तय माना जा रहा है. दिग्विजय सिंह के भाई पूर्व सांसद लक्ष्मणसिंह चांचौड़ा से चुनाव जीते हैं. वे भी रेस में हैं लेकिन कमलनाथ की पहली कैबिनेट में उन्हें शायद ही जगह मिले.

पचौरी खेल सकते हैं ब्राम्हण कार्ड
सुरेश पचौरी, अजय सिंह, अरुण यादव चुनाव हार चुके हैं लेकिन वे विंध्य, निमाड़ से अपने समर्थक विधायकों के लिए दबाव बना सकते हैं. पचौरी खेमे से गिनती के विधायक बने हैं उनमें से कई पहली बार के हैं. लेकिन कैबिनेट में सवर्ण ब्राम्हण कार्ड के तहत उनके समर्थक जगह बना सकते हैं.

आदिवासी नेता अलावा
मालवा – निमाड़ में आदिवासी वोटों को कांग्रेस के पक्ष में करने का काम जयस ने भी किया है. कांग्रेस में शामिल हुए जयस नेता डा. हीरालाल अलावा मनावर से चुनाव जीतकर आए हैं. उनके लिए भी आदिवासी वर्ग से मंत्री बनाने का दबाव है. हालांकि अलावा पहली बार के विधायक हैं.

बसपा – सपा का कोई दबाव नहीं
बसपा और सपा ने मध्यप्रदेश में कांग्रेस को समर्थन दिया है. लेकिन कैबिनेट में उनके विधायकों को जगह मिलने की संभावना कम है. इसकी वजह ये है कि चार निर्दलीय विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने के बाद कमलनाथ सरकार बहुमत के आंकड़े को पार कर चुकी है. कुल 118 विधायक अब कांग्रेस के हैं. ऐसे में बसपा के दो और सपा के विधायक के लिए किसी तरह का दबाव कांग्रेस सरकार पर नहीं है.