पुरानी पेंशन नहीं तो वोट नहीं : बंधु
"यदि देश में विद्रोह हुवा तो पेंशन को लेकर होगा"
अर्धसैनिक बलों को भाषण नहीं पुरानी पेंशन ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी
*पुरानी पेंशन के आंदोलन की चिंगारी पूरे देश मे दहकाने वाले अटेवा संगठन के अध्यक्ष विजयकुमार बंधु से सीधी बात*
नागपुर
देश में बदलती परिस्थितियों और मुखर होते पुरानी पेंशन के आंदोलन की ओर इशारा करते हुए देश में विद्रोह की संभावना और पुरानी पेंशन नही तो वोट नही का आने वाले समय की ओर आगाज "अटेवा" ऑल टीचर्स एम्प्लाइज वेलफेयर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पुरानी पेंशन आंदोलन को पूरे देश में मुखर करने वाले विजयकुमार बंधु ने किया है।
उन्होंने चर्चा में कहा कि शहिद हुए अर्धसैनिक बलों को भाषण नहीं चाहिए उन्हें पुरानी पेंशन बहाल कर दीजिए वही सच्ची श्रद्धांजलि होगी। श्री बंधु रविवार 3 मार्च 2019 को पुरानी पेंशन को लेकर यूनिवर्सिटी प्रोफेसर्स एसोसिएशन द्वारा नागपुर में आयोजित एकदिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार में प्रमुख वक्त के रूप में उपस्थित थे । श्री बंधु ने चर्चा में कहा कि प्राध्यापकों की बौद्धिक निष्क्रियता के कारण ही संसद में कम पढ़ा लिखा आदमी भी शिक्षा मंत्री होता है और छिपकली से डरने वाला रक्षा मंत्री ।
नेशनल संदेश से चर्चा में बंधु ने कहा कि बहादुरशाह जफर को पेंशन मिली,अताताई,अत्याचारी अंग्रेजों ने 1935 में पेंशन को कानूनी रूप दिया और आजाद भारत सरकार ने पुरानी पेंशन बंद कर दी। इसपर एक प्रधानमंत्री बोला नहीं और एक चुप नही हो रहा। मन की बात नही ,जन की बात और पुरानी पेंशन की बात कर लो तो वैतरणी पार हो सकते हो।उन्होंने वर्तमान सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि मोदी जी को हराने में विपक्ष की जरूरत नही, एक जेटली ही काफी है। मोदी लहर में ऐरे गैरे नत्थू खैरे संगत हो गए और उस लहर में जेटली हार गए।उन्होंने कसम खाई की मोदी तुम्हारी लहर में हार गया अगली बार तुम्हारी लहार ही खत्म कर दूंगा। इस लिए जेटली जी उटपटांग योजनाएं ला रहे है, ताकि मोदी जी हार जाए। जेटली सुप्रीम कोर्ट को कहते हैं, खबरदार देश का पैसा कहां खर्च करना संसद तय करेगी, किन्तु जेटली जी संसद में कौन जाएगा वो हम तय करेंगे।
बंधु ने कहा कि सेना और जस्टिसों को पेंशन है । सेना के लिए चलेगा, उन्हें जरूरत है, हम उनके लिए जान देंगे किन्तु जस्टिस है, जस्टिस नहीं हो रहा अब सिर्फ जज हो रहा है।
उन्होंने पुरानी पेंशन के आंदोलन के नागपुर से हुवे आगाज को पूरे देश की यूनिवर्सिटी में ले जाने तथा जेएनयू से इसे शुरू करने की बात कही।आंदोलन और तेज होगा।बेरोजगार जो फॉर्म भर रहे हैं वे हमारे संघर्ष के साथी होंगे। भविष्य के लिए यह लड़ाई है।बुढ़ापे के सहारे,परिवार और बच्चो के लिए यह लड़ाई है।
सरकार कहती है पेंशन देना बहुत बड़ा भार है । सचिन तेंदुलकर राज्य सभा सदस्य थे उन्हें पेंशन की ज्यादा जरूरत है,जया बच्चन एक गरीब इंसान का नाम है उन्हें पेंशन की ज्यादा जरूरत है, माल्या को राज्य सभा की पेंशन वीदेश में मिलेगी ,इन गरीबों को पेंशन की क्या ? ज्यादा जरूरत है ।हमने एक सिलेंडर छोड़ दिया क्या प्रधानमंत्री जी विधायक, सांसदों की पेंशन छुड़वाएँगे।
श्री बंधु ने बताया कि प्रधानमंत्री जी की 84 वीदेश यात्राओं, विज्ञापनों पर 64 अरब रुपये खर्च हुए थे। ये पैसे क्या चाय की दुकान से इकठ्ठा किये थे क्या?, ये किसका पैसा है ? कहते है पेंशन पर भर है, झूठ बोलना बंद कीजिए।
बंधु ने कहा कि सैनिकों से टैक्स लेते हो और विधायक,सांसद लाखों रुपये वेतन लेते है और टैक्स एक पैसे का नही।अर्धसैनिक बलों में पुरानी पेंशन को लेकर इतना गुस्सा है कि बार्डर पर उठने वाली बंदूकें देश के नेताओं पर न उठ जाए। बंधु ने एक ही पेंशन,पुरानी पेंशन ,पेंशन नही तो वोट नही का नारा भी आंदोलन के लिए दिया ।
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