प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रैली को किया संबोधित-मोदी का ममता को चैलेंज, 'इस बार खेला नहीं, आपका खेल खत्म होगा'
कोलकाता
आज कोलकाता के ब्रिगेड ग्राउंड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय जनता पार्टी की एक रैली को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने ना सिर्फ बंगाल में भागवा पार्टी की जीत का दावा किया, बल्कि मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी पर भी जमकर निशाना साधा। रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विधानसभा चुनाव में बीजेपी प्रत्याशियों के लिए वोट की अपील की। मंच पर अभिनेता से राजनेता बने मिथुन चक्रवर्ती ने प्रधानमंत्री का स्वागत किया।
पोर्ट से लेकर एक्सपोर्ट तक, टी से टूरिजम तक, माछ से लेकर भात तक... बंगाल की मिट्टी से सबकुछ है। पश्चिम बंगाल की माटी और समंदर में सबकुछ है, जो जीवन को बेहतर बनाने के लिए जरूरी है। कोलकाता तो सिटी ऑफ जॉय है, कोलकाता के पास समृद्ध अतीत की विरासत भी है और भविष्य की संभावनाएं भी हैं। ऐसा कोई कारण नहीं है कि कोलकाता के कल्चर को सुरक्षित रखते हुए इसे सिटी ऑफ फ्यूचर ना बनाया जा सके। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि इनकी कमीशनबाजी की वजह से कोलकाता एयरपोर्ट से जुड़े कई काम तक रुके हुए हैं। ऐसे रुके हर काम को भाजपा सरकार में तेज गति दी जाएगी। यहां के स्मार्ट सिटी प्रॉजेक्ट को भाजपा सरकार में नई ऊर्जा मिलेगी।'
आज जब भारत अपनी आजादी के 75 वर्ष में प्रवेश कर रहा है, तो बंगाल एक नई ऊर्जा, एक नए संकल्प के साथ आगे बढ़ेगा। देश की तरह ही बंगाल के विकास के लिए भी अगले 25 साल बहुत अहम हैं। इन 25 वर्षों की शुरुआत का पहला पड़ाव, ये विधानसभा चुनाव हैं। आजादी के नारे पर कांग्रेस सत्ता में आई थी, आजादी के बाद कुछ समय काम हुआ लेकिन फिर बंगाल पर वोट बैंक की राजनीति हावी होती चली गई। इस राजनीति को वामपंथियों ने और बढ़ाया और नारा दिया- कांग्रेसेर कालो हाथ, भेंगे दाओ, गुड़िये दाओ। आज ये काला हाथ गोरा कैसे हो गया।'
क्या बंगाल के युवाओं के रोजगार की स्थिति में परिवर्तन आया? क्या बंगाल के औद्योगीकरण में वो परिवर्तन आया, जितना उसका सामर्थ्य है? क्या दशकों से चली आ रही खून-खराबे की राजनीति में परिवर्तन आया? वामपंथियों के विरुद्ध ममता दीदी ने परिवर्तन का नारा दिया था। पश्चिम बंगाल से मां, माटी, मानुष के लिए काम करने का वादा किया था। पिछले 10 साल से यहां टीएमसी की सरकार है, क्या सामान्य बंगाली परिवार के जीवन में वो परिवर्तन आया, जिसकी उसे अपेक्षा थी? आज बंगाल का मानुष परेशान है। वो अपनी आंखों के सामने अपनों का खून बहता देखता है। वो अपनों को अपनी आंखों से सामने लुटते देखता है। वो अपनों को इलाज के अभाव में दम तोड़ते देखता है। वो अवसरों के अभाव में अपनों को पलायन करते देख रहा है। और पूरा बंगाल अब एक स्वर में कह रहा है- आर नॉय,आर नॉय।'
माटी की बात करने वालों ने बंगाल का कण-कण, तिनका-तिनका, बिचौलियों, कालाबाजारी करने वालों और सिंडिकेट के हवाले कर दिया। आज बंगाल का मानुष परेशान है। वो अपनी आंखों के सामने अपनों का खून बहता देखता है। वो अपनों को अपनी आंखों से सामने लुटते देखता है।'आज पश्चिम बंगाल के नौजवान, यहां के बेटे-बेटियां आपसे एक ही सवाल पूछ रहे हैं। उन्होंने आपको दीदी की भूमिका में चुना था, लेकिन आपने खुद को एक ही भतीजे की बुआ तक सीमित क्यों कर दिया? आपने एक ही भतीजे की बुआ होने के मोह को क्यों चुना? बंगाल के लाखों भतीजे-भतीजियों की आशाओं के बजाय आप अपने भतीजे का लालच पूरा करने में क्यों लग गईं? आप भी भाई-भतीजावाद के उन कांग्रेसी संस्कारों को छोड़ नहीं पाईं, जिनके खिलाफ आपने बगावत की थी।'
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