वर्ल्ड बैंक ने बताया कौन है भारतीयों की गरीबी और कर्ज के लिए जिम्मेवार ?
नई दिल्ली
भारत में सड़क दुर्घटना तो होते ही रहते हैं। यहां इसे रोकने के लिए न तो प्रशासनिक स्तर पर मुस्तैदी रहती है और न ही लोग जागरूक हैं। अक्सर दोपहिया चलाने वाले बिना हेलमेट के सड़कों पर निकल पड़ते हैं। जहां लोग हेलमेट लगाते हैं, वहां भी सड़क सुरक्षा उद्देश्य नहीं है बल्कि चालान कटने के डर ज्यादा है। अभी इस पर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट आई है।
विश्व बैंक या वर्ल्ड बैंक से तो आप परिचित होंगे ही। वर्ल्ड बैंक का कहना है कि भारत के 75 फीसदी से अधिक गरीब परिवारों की आमदनी में कमी का कारण सड़क दुर्घटना है। इस तरह की सड़क दुर्घटनाओं के कारण गरीब परिवार को सात महीने से भी अधिक समय तक आय का नुकसान उठाना पड़ता है। वहीं, यदि दुर्घटना किसी अमीर व्यक्ति के साथ हो, उनके परिवार के लिए आमदनी में नुकसान एक महीने की आय से भी कम होता है। इसका खुलासा विश्व बैंक की नई रिपोर्ट में हुआ है।
वर्ल्ड बैंक की “Traffic Crash Injuries and Disabilities: The Burden on Indian Society” शीर्षक से तैयार रिपोर्ट में बताया गया है कि गरीब परिवारों पर सड़क दुर्घटनाओं का किस तरह से असर पड़ता है, जिससे वे गरीबी और कर्ज के दुष्चक्र में फंस जाते हैं। यह रिपोर्ट सड़क दुर्घटना, गरीबी, असमानता और सड़क के संवेदनशील उपयोगकर्ताओं के बीच संबंध पर रोशनी डालती है। सड़क सुरक्षा पर आधारित यह अध्यन एक राष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठन-सेव लाइफ फाउन्डेशन के सहयोग से किया गया। सर्वेक्षण के तहत चार भारतीय राज्यों- उत्तर प्रदेश, बिहार, तमिलनाडु और महाराष्ट्र से आंकड़े जुटाए गए। यह अध्यन गरीब एवं वंचित परिवारों पर सड़क दुर्घटनाओं के कारण पड़ने वाले सामाजिक, आर्थिक, लैंगिक एवं मनोवैज्ञानिक प्रभावों का मूल्यांकन करता है।
इस रिपोर्ट को जारी करते वक्त केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा “हमने भारत में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को कम करने के लिए कई सकारात्मक प्रयास किए हैं। समाज के सभी हितधारकों के सहयोग से हम 2025 तक सड़क दुर्घटना के कारण होने वाली मौतों में 50 फीसदी कमी लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।” उनका कहना है ‘‘यह रिपोर्ट सड़क दुर्घटना के प्रभाव और गरीबी के बीच के संबंध पर रोशनी डालती है। मैं सभी राज्य सरकारों से आग्रह करता हूं कि तत्काल प्रभाव के साथ मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 लागू करें तथा समाज के गरीब एवं वंचित वर्ग पर सड़क दुर्घटनाओं के प्रभावों को कम करने के लिए एक साथ मिलकर काम करें।”
सर्वेक्षण के मुताबिक कम आय वाले ग्रामीण परिवार पर सड़क दुर्घटना का सबसे अधिक प्रभाव (56 फीसदी) पड़ता है, वहीं कम आय वाले शहरी गरीब परिवार पर 29.5 फीसदी और उच्च आय वाले ग्रामीण परिवार पर 39.5 फीसदी प्रभाव पड़ता है। परिवार गरीब हो या अमीर, परिवार में किसी भी व्यक्ति के साथ दुर्घटना के मामले में महिलाओं पर बोझ बढ़ जाता है, ऐसे मामलों में उन्हें ज़्यादा काम करना पड़ता है, उनकी ज़िम्मेदारियां बढ़ जाती है, दुर्घटना से पीड़ित व्यक्ति की देखभाल का ज़िम्मा उन पर ही आ जाता है। दुर्घटना के बाद तकरीबन 50 फीसदी महिलाओं पर पारिवारिक आय कम होने का बुरा असर पड़ता है। वहीं 40 फीसदी महिलाओं का काम करने का तरीका बदल जाता है, 11 फीसदी महिलाओं को आर्थिक संकट से निपटने के लिए ज़्यादा काम करना पड़ता है।
World Bank के अध्ययन में बीमा कवरेज की उपलब्धता की कम दरों पर भी रोशनी डाली गई है, इसके अलावा कानूनी मुआवजे के मामले में जागरुकता की कमी को भी बताया गया है। सर्वेक्षण के दो-तिहाई ट्रक चालक थर्ड पार्टी बीमा के बारे में जागरुक नहीं थे। किसी भी ड्राइवर ने अस्पताल में कैशलैस उपचार के लिए आवेदन नहीं किया था, न ही दुर्घटना के मामले में सोलेटियम फंड या एक्स-ग्रेटिया योजना के फायदों के लिए आवेदन किया था।
वर्ल्ड बैंक के दक्षिणी एशिया क्षेत्र के लिए उपाध्यक्ष हार्टविग शाफर का कहना है “सड़क दुर्घटना का गरीब परिवार पर विनाशकारी प्रभाव पड़ता है, पहले से गरीब परिवार और अधिक गरीबी में चक्र में फंस जाता है।” उनका कहना है ‘‘वर्ल्ड बैंक गरीब परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार को सहयोग प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि इस तरह की दुर्घटना के मामले में परिवार पर आर्थिक बोझ को कम किया जा सके और उन्हें अचानक आई आपातकालीन स्थिति से निपटने में मदद की जा सके।”
इस रिपोर्ट में आर्थिक बोझ के अलावा, रिपोर्ट सड़क दुर्घटना के सामाजिक प्रभाव पर भी प्रकाश डाला गया है। कम आय वाले 64 फीसदी परिवारों ने बताया कि दुर्घटना के चलते उनके जीवनस्तर में गिरावट आई है (उच्च आय वर्ग वाले परिवारों की तुलना में दोगुना), वहीं 50 फीसदी से अधिक परिवारों ने दुर्घटना के बाद मानसिक तनाव की बात कही। सेव लाईफ फाउंडेशन के सीईओ पीयूष तिवारी का कहना है “रिपोर्ट के परिणाम उन क्षेत्रों पर भी रोशनी डालते हैं, जहां तुरंत सुधार की आवश्यकता है जैसे दुर्घटना के बाद आपातकालीन देखभाल और प्रोटोकॉल तथा बीमा एवं मुआवजे की प्रणाली।
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