सरकार बनने के 29 दिन बाद शिवराज कैबिनेट विस्तार, सिंधिया समर्थकों को भी जगह

सरकार बनने के 29 दिन बाद शिवराज कैबिनेट विस्तार, सिंधिया समर्थकों को भी जगह

भोपाल
कोरोना क्राइसिस के बीच शिवराज सिंह चौहान के कैबिनेट का विस्तार हो गया है। टीम शिवराज में 5 लोगों को शामिल किया गया है। दिल्ली से सोमवार शाम को हरी झंडी मिलने के बाद सीएम शिवराज सिंह चौहान ने गवर्नर लालजी टंडन से बात की थी। उसके बाद राजभवन में शपथग्रहण की तैयारी शुरू हो गई थी। सबसे पहले नरोत्तम मिश्रा ने शपथ ली है।

उसके बाद सिंधिया खेमे के तुलसी सिलावट ने शपथ ली। तुलसी सिलावट कमलनाथ की सरकार में भी स्वास्थ्य मंत्री रहे हैं। तुलसी के बाद बीजेपी विधायक कमल पटेल ने मंत्री पद की शपथ ली है। कमल पटेल हरदा से विधायक हैं। ये पूर्व सीएम उमा भारती के करीबी हैं। इसके साथ ही सिंधिया कोटे से गोविंद सिंह राजपूत ने भी मंत्री पद की शपथ ली है। गोविंद सिंह राजपूत कमलनाथ की सरकार में परिवहन मंत्री रहे हैं।

इन मंत्रियों ने ली शपथ..

नरोत्तम मिश्रा

कमल पटेल

मीना सिंह

तुलसीराम सिलावट

गोविंद सिंह राजपूत

मानपुर से 5 बार विधायक रहीं मीना सिंह ने भी मंत्री पद की शपथ ली हैं। बीजेपी ने जो टॉस्क फोर्स बनाई थी, उसमें भी मीना सिंह शामिल थी। पार्टी की आदिवासी चेहरा हैं। बताया जाता है कि प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा की करीबी हैं।

जातिगत समीकरणों को साधने की कोशिश
इस बार शिवराज कैबिनेट में जातिगत समीकरणों को साधने की कोशिश की गई है। 5 मंत्री 5 समाज से आते हैं। इसके साथ ही हर खेमे के लोगों को भी तवज्जो दी गई। कमल पटेल कुर्मी समुदाय से आते हैं, नरोत्तम मिश्रा ब्राह्मण, मीना सिंह आदिवासियों का प्रतिनिधित्व करती हैं, साथ ही महिला भी हैं। राजपूत समाज से गोविंद सिंह राजपूत को जगह मिली हैं और तुलसी सिलावट अनुसूचित जाति वर्ग से आते हैं।

दिग्गजों का कटा पता
टीम शिवराज के गठन में इस बार पूरी तरह से दिल्ली की चली है। राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की मुहर के बाद ही कैबिनेट का विस्तार हुआ है। आखिरी वक्त बीजेपी के दो बड़े नेताओं का नाम चल रहा था, जिसमें पूर्व नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव और पूर्व गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह शामिल हैं। बाद में दिल्ली से साफ कर दिया गया कि अभी टीम छोटी ही रहेगी। भूपेंद्र सिंह तो शपथ के लिए भोपाल पहुंच भी गए थे। पार्टी से हरी झंडी नहीं मिली तो वह वापस सागर चले गए।

गौरतलब है कि एक तरफ देश में लॉकडाउन लगा हुआ है और इस दौरान किसी तरह के राजनीतिक कार्यक्रम की इजाजत नहीं दी जा रही है. इस सबके बीच आज शिवराज सरकार का कैबिनेट विस्तार हुआ है. कोरोना संकट के बीच राज्य में गृह या स्वास्थ्य मंत्री ना होने के कारण विपक्ष शिवराज सिंह चौहान पर निशाना साध रहा था.

आपको बता दें कि इनमें से तुलसीराम सिलावट और गोविंद सिंह राजपूत की गिनती ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थकों में होती है. ऐसे में साफ है कि कांग्रेस का दामन छोड़ भाजपा में आए सिंधिया का सरकार गठन में बड़ा रोल रहा है.

राजभवन में राज्यपाल लालजी टंडन ने सभी नए मंत्रियों को शपथ दिलवाई. इस दौरान भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती भी वहां पर मौजूद रहीं.

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश विधानसभा में कुल 230 सीटें हैं. इस हिसाब से सरकार में मुख्यमंत्री सहित कुल 35 विधायक मंत्री बन सकते हैं. शिवराज की नई सरकार में सामाजिक समीकरण और क्षेत्रीय संतुलन साधने की कवायद दिखी.

कमलनाथ सरकार गिरने के बाद 'मामा' की वापसी

कमलनाथ और पूर्व सीएम दिग्‍विजय सिंह से अनबन होने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया था. इसके बाद सिंधिया के 22 समर्थक विधायकों ने भी कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था, जिसमें 6 कैबिनेट मंत्री भी शामिल थे.

इसी वजह से कमलनाथ की सरकार गिर गई थी और एक बार फिर शिवराज सिंह चौहान को राज्य का सीएम बनने का मौका मिला. कांग्रेस से इस्तीफा देने वाले सिंधिया के 22 समर्थक विधायकों ने बीजेपी का दामन थाम लिया.