सरकार और ठेकेदारों के बीच सुलह के बाद MP में शराब की दुकानें खुलीं, इंदौर-भोपाल-उज्जैन में शटर डाउन रहेंगे
भोपाल
दो दिन से जारी तकरार के बाद आखिरकार मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में शराब की दुकानों (Wine Shops) के शटर उठने शुरू हो गए हैं. शराब ठेकेदारों और सरकार के बीच बुधवार को हुई बातचीत में सहमति बन गयी. सरकार ने ठेकेदारों की मांग पर तीन-चार दिन में विचार करने का आश्वासन दिया जिसके बाद ठेकेदारों ने अनुमति प्राप्त इलाकों में महीने भर से ज्यादा समय से बंद पड़ी अपनी दुकानें खोलने का ऐलान किया. ठेकेदार एक्साइज ड्यूटी में छूट देने की मांग कर रहे हैं. फिलहाल लॉकडाउन के कारण सरकार ने सिर्फ ग्रीन जोन की दुकानें और ऑरेंज जोन में कंटेनमेंट एरिया के बाहर की दुकानें खोलने की छूट दी है.
दोनों पक्षों में हुई बातचीत के बाद भोपाल, इंदौर और उज्जैन को छोड़कर पूरे प्रदेश के ग्रीन जोन और ऑरेंज जोन के कंटेनमेंट के बाहर के इलाकों में शराब की दुकानें खोलने पर सहमति बन गयी. सरकार ने लॉकडाउन 3.0 शुरू होने के बाद पांच मई से दुकानें खोलने की इजाजत दे दी थी. लेकिन शराब लॉबी एक्साइज ड्यूटी कम वसूलने की मांग पर अड़ी हुई थी. हालांकि वो हवाला कोरोना संक्रमण (COVID-19) का दे रही थी. दोनों पक्षों के बीच सहमति होते ही महीना भर से ज्यादा समय से बंद शराब की दुकानों के शटर उठने शुरू हो गए.
प्रदेश के ग्रीन जोन वाले 24 जिलों में शराब की दुकान खोलने को लेकर शराब ठेकेदार तैयार हो गए हैं. बीते दो दिन से सरकार और शराब ठेकेदारों के बीच बनी तकरार बुधवार को बैठक के बाद खत्म हो गई है. आबकारी विभाग के अफसरों के रुख के बाद शराब ठेकेदारों ने तत्काल शराब दुकान खोलने का फैसला लिया है. सरकार ने ठेकेदारों को उनकी मांग पर अगले तीन से चार दिन में फैसला लेने का भरोसा दिलाया है. शराब ठेकेदारों ने सरकार से इस बात की मांग की थी कि जितना माल बेचा जाए उतनी ही ड्यूटी लगाई जाए. साथ ही बीते दो महीने में जो नुकसान हुआ है उसके कोटे से उन्हें बंधन मुक्त किया जाए. इन तमाम मांगों पर सरकार और लॉबी के बीच वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बैठक में विचार हुआ. सरकार का आश्वासन मिलते ही ठेकेदारों ने अनुमति वाले सभी इलाकों में तत्काल शराब की दुकानें खोलने का ऐलान कर दिया.
ठेकेदारों ने आबकारी विभाग के अपर मुख्य सचिव और आयुक्त से चर्चा में कहा कि शराब दुकानों से जितनी शराब बिके, सरकार ठेकेदार से उतना ही पैसा ले. इनकी ओर से यह भी सुझाव दिया गया कि वर्ष 2020-21 में 25 प्रतिशत अधिक बोली लगाई गई है. इसे चालू साल में वापस लिया जाए और वर्ष 2019-20 की लाइसेंस फीस पर शराब बिक्री की अनुमति दी जाए. इसके बाद 2021-22 में शराब का ठेका दो साल के लिए दे दिया जाए और उसमें 25 प्रतिशत या जो भी सरकार बढ़ोतरी करना चाहे वो कर सकती है. ठेकेदारों की ओर से यह भी कहा गया कि जो ठेकेदार दुकान चलाने की स्थिति में नहीं हैं, उन्हें ठेका छोड़ने की अनुमति दी जाए. शराब दुकान खोलने पर शराब की खेप ले जाने और कर्मचारियों के आने-जाने के लिए पास बनाने की अनुमति आबकारी विभाग को दी जाए.
बताया जा रहा है कि आर्थिक मुद्दों से जुड़ी मांगों पर अफसरों ने मंत्रालय में चर्चा के बाद ही फैसला लेने की बात कही है. साथ ही आश्वस्त किया है कि ठेकेदारों के हित में उचित फैसला लिया जाएगा.
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