मूर्तिकारों के रज़ा शिविर का हुआ शुभारंभ

मूर्तिकारों के रज़ा शिविर का हुआ शुभारंभ

मूर्तिकारों के रज़ा शिविर का हुआ शुभारंभ

अपनी कल्पना को शिला में ढालेंगे शिल्पकार

मण्डला - शुक्रवार को रज़ा फ़ाउण्डेशन द्वारा जिला पुरातत्व पर्यटन एवं संस्कृति परिषद के सहयोग से जबलपुर रोड स्थित होटल विट्ठल इन में मूर्तिकारों के रज़ा शिविर का शुभारंभ हुआ। 17 अक्टूबर 2021 तक चलने वाले इस शिविर का संयोजन ख्याति प्राप्त वरिष्ठ कलाकार अखिलेश करे रहे है। इस मूर्तिकला कार्यशाला में बस्तर से धरम नेताम, राजनांदगांव से मनीषा वर्मा, जबलपुर से आरती नागले व सुषमा सरोज, अमरकंटक से जयपाल सिंह टेकाम, बालोद से सुरेश कुमार कुंभकार, ग्वालियर से अनिल बाथम और मण्डला से आशीष कछवाहा व भंगी लाल हरदहा शामिल है। कार्यशाला संपन्न होने के बाद निर्मित शिल्पकृतियों को एक सप्ताह के लिए रज़ा कला विथिका में प्रदर्शित किया जायेगा। इस शिविर का संयोजन कर रहे अखिलेश ने बताया कि रज़ा फाउंडेशन की तरफ से आयोजित की जाने वाली है दूसरी वर्कशॉप है। यह मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के युवा कलाकारों के लिए आयोजित की गई है। इसके पहले मांडू में चित्रकला कार्यशाला आयोजित की गई थी जिसमें प्रदेश के 10 युवा कलाकार शामिल हुए थे। मंडला में यह दूसरी कार्यशाला है जो की मूर्तिकारों की आयोजित की गई है। रज़ा साहब हमेशा युवा चित्रकारों व कलाकारों को आगे बढ़ाने की बात करते थे। रज़ा साहब छोटे बच्चों के लिए काफी स्नेह रखते थे और युवा कलाकारों के लिए काफी काम करते रहे तो उसी को ध्यान में रखते हुए फाउंडेशन उसी को आगे बढ़ा रहा है। रज़ा साहब की जन्मशती के अवसर पर यह वर्कशॉप आयोजित की गई है। मार्च 2022 में दिल्ली 100 युवा कलाकारों की विशाल प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। 

इस शिविर में शामिल जबलपुर की युवा कलाकार आरती नागले ने कहा कि रज़ा साहब की स्मृति में यह वर्कशॉप हो रही है, इसमें हम स्टोन कार्विंग करेंगे।  नए कलाकारों के साथ मिलकर काम करने में काफी चीजें सीखने को मिलेगी। अलग-अलग जगह के कलाकारों से मिलने पर हमें नई नई चीजों की जानकारी मिलती है। उनके काम देखने को मिलते है कि वे किस तरीके से काम कर रहे हैं, हम उनसे क्या सीख सकते हैं। इस तरीके की जो वर्कशॉप होती है उसमे काफी अच्छा अनुभव मिलता है। हम पत्थर में काम करते हैं। यह सेंड स्टोन है। इसमें हम लोग छैनी चलाकर देखी तो पता लगा कि यह काफी अच्छा है। इसके पहले हमने जबलपुर व कटनी के सैंड स्टोन में काम किया था। यह बाहर का सैंड स्टोन है इसमें काम को लेकर मैं काफी रोमांचित हूँ। उन्होंने बताया कि वो किताबों की थीम पर सीरीज करती है। जो लोग किताम पढ़ते है वो सोचते हैं, कुछ लोग जो पढ़ नहीं पाते वो क्या सोचते है ? इसी थीम पर मैं काम कर रही हूं।

बस्तर के युवा कलाकार धरम नेताम ने इस आयोजन के लिए फाउंडेशन के प्रति आभार जताते हुए कहा कि इस शिविर में नई चीज़ सीखने को मिलेगी। रज़ा फाउंडेशन हमेशा पेंटिंग की वर्कशॉप कराती थी लेकिन इस बार उसने स्टोन की वर्कशॉप करवाई है और सेंड स्टोन को लेकर आए है । इसमें हमें कार्विंग करने का मौका मिलेगा। इसमें अच्छे से अच्छा काम हो सकता है। यह सॉफ्ट स्टोन है, इसमें काम करने में काफी आसानी होगी और हम उसको लेकर काफी उत्साहित हैं क्योंकि अलग-अलग जगह का शिल्पकार सब मिलकर काम करेंगे। इस दौरान शिल्पकारों के साथ - साथ गजेंद्र सोनी, जयदत्त झा, प्रवीण सैयाम, आनंद प्रकाश तिवारी आदि उपस्थित थे।