मुंबई, शादी में कई तरह की रस्मों को अदा किया जाता है। रामायण में भगवान राम ने शिव धनुष तोड़कर सीताजी से स्वयंवर रचाया था। लेकिन 21वीं सदी में धनुर्विद्या खेल में माहिर स्वामीनी ने अपनी ही शादी में भी तीरंदाजी प्रदर्शन किया। धनुर्विद्या खेल महत्व सभी को समझ में आए यह उसका उद्देश्य था। इसलिए शादी के फेरे लेने से पहले उन्होंने लग्न मंडप के स्टेज पर रखे लक्ष्य को निशाना बनाते हुए अपना तीरंदाजी का सबसे अच्छा प्रदर्शन किया।

दरअसल, महाराष्ट्र के शिरडी के पास श्रीरामपूर गांव के रिटायर तलाठी अनिल उनवणे की बेटी स्वामीनी की शादी मंगलवार को प्रसाद भांगे के साथ हुई। इस शादी में दुल्हन बनी स्वामिनी ने अपनी धनुर्विद्या पेश कर इस समारोह को अनूठा बना दिया। उधर, स्वामीनी के स्टूडेंट्स ने मंडप के ऊपर सजे गुब्बारे तीर सें फोड़कर मेहमानों का स्वागत किया। पुराणकाल से धनुर्विद्या अस्तित्व है। खेल अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर भी खेला जाता है। लेकिन अन्य खेलों के मुकाबले धनुर्विद्या आधुनिक काल में पीछे चली गयी है। लेकिन धनुर्विद्या में पारंगत स्वामीनी ने तीरंदाजी का अच्छा प्रदर्शन करके अपनी शादीशुदा जिंदगी की शुरुआत की। कभी राज्यस्तर पर तीरंदाजी में अपना हुनर दिखाने वाली स्वामीनी शादी के बाद भी राष्ट्रीय स्तर पर खेलना चाहती हैं। अभी वो राज्यस्तर की तीरंदाजी की खेलों की पंच भी हैं। स्वामिनी का कहना है कि शादी में कुछ अलग करने की इच्छा थी। मैं धनुर्विद्या में माहिर हूं इसलिए मैंने तीरंदाजी का प्रदर्शन कर मेहमानों को अनूठा गिफ्ट दिया। कोच शुभांगी दलवी का कहना है कि स्वामिनी के इस प्रयास से मैं खुश हूं। इससे धनुर्विद्या को प्रोत्साहन मिलेगा। दुल्हा प्रसाद भांगे कहता है कि मेरी बीवी तीरंदाज है। आगे भी राष्ट्रीय स्तर पर खेलने के लिए प्रोत्साहित करूंगा। धनुर्विद्या को बढ़ावा मिले इसलिए दोनों मिलकर काम करेंगे।