संपूर्ण भुगतान की निष्पक्ष किसी बड़ी जांच एजेंसी से स्वतंत्र जांच कराने की मांग
भोपाल। मप्र शासन द्वारा गलत तरीके से केरोना के मरीजों के नाम पर चिरायु अस्पताल के मालिक अजय गोयनका (जो व्यापम कांड के आरोपी है )को करोड़ों रूपये का भुगतान किया जा रहा है, जबकि भोपाल मे कई बड़े सरकारी अस्पताल मौजूद है, इस सम्बन्ध मे उच्च न्यायलय सामाजिक कार्यकर्त्ता भुवनेश्वर मिश्रा ने रिट पिटीशन दायर की है।
याचिका के प्रमुख आधार
कोविड 19 के मरीजों के भर्ती उपचार का सेंटर चिरायु मेडिकल कॉलेज भैंसा खेड़ी भोपाल तथा बंसल अस्पताल शाहपुरा भोपाल को बनाया गया है। यह पूरी तरह विधि विरुद्ध है जबकि भोपाल में लगभग 100 विस्तरों वाला हमीदिया अस्पताल जहां प्रशिक्षित कई डॉक्टर मौजूद हैं। शासन द्वारा हमीदिया अस्पताल के चिकित्सको करोड़ों रुपयों का प्रतिमाह वेतन दिया जाता है, हमीदिया अस्पताल मे वर्तमान में कोविड 19 महामारी के मरीज़ो का यहां इलाज नहीं करवाया जा रहा इसी प्रकार भोपाल में ही स्थि एम्स अस्पताल है ये भी करीब 50 से अधिक बेड वाला व्यवस्थित अस्पताल है यहाँ भी केरोना बीमारी का इलाज पूरी तरह से नहीं हो पा रहा है, भोपाल में ही भोपाल मेमोरियल अस्पताल भी है यहां पर लगभग 80 विस्तरों वाला क्षमता युक्त व्यवस्थित अस्पताल है। इन सभी शासकीय अस्पतालों में शासन द्वारा करोड़ों रुपए का स्पेशलिस्ट चिकित्सकों व अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को वेतन भी दिया जाता है।
परन्तु भयंकर महामारी में विधिवत तौर पर इन शासकीय अस्पताल का इस्तेमाल शासन द्वारा जानबूझकर नहीं किया जा रहा। अपितु मध्यप्रदेश शासन द्वारा को भी कोविड 19 की महामारी में संक्रमित व्यक्तियों के उपचार के लिए भोपाल मे बैरागढ़ स्थित चिरायु अस्पताल व अस्पताल शाहपुरा भोपाल को अधिकृत किया गया है। आरोप लगाया गया है कि नियम विरुद्ध तरीके से अस्पताल को सुविधाएं प्रदान की जा रही है। आरोप में कहा गया है मरीजो के उपचार में ज्यादा पैसे का भुगतान किया जा रहा है।
इस रिट पिटीशन के माध्यम से उच्च न्यायालय से मांग की गयी है की चिरायु अस्पताल एवं बंसल अस्पताल को मध्यप्रदेश शासन द्वारा कोबिट 19 महामारी के दौरान मध्यप्रदेश शासन द्वारा अब तक किया गया। संपूर्ण भुगतान की निष्पक्ष किसी बड़ी जांच एजेंसी से स्वतंत्र जांच कराई जाए भ्रष्टाचार कार्य करने वाले व दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध एफ आई आर दर्ज की जाए तथा कोबिट 19 महामारी के मरीजों का उपचार भोपाल स्थित शासकीय अस्पतालों में ही किए जाने की व्यवस्था करें।