RTE नियम के कारण प्रदेश के 26 हजार निजी स्कूलों में 4 लाख सीटें खाली
भोपाल
कोरोना संक्रमण के प्रकोप के कारण इस सत्र में प्रदेश के प्रायमरी व मिडिल स्कूल नहीं खुलेंगे। शासन ने अगले साल एक अप्रैल से शैक्षणिक सत्र की शुरुआत करने के निर्देश दिए हैं। इस कारण इस बार निजी स्कूलों में शिक्षा के अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत 25 फीसद सीटों पर गरीब बच्चों के एडमिशन नहीं होंगे। इस वजह से प्रदेश के 26 हजार निजी स्कूलों की करीब 4 लाख सीटें खाली रह जाएंगी।
अब निजी स्कूल के संचालकों का कहना है कि शासन को पहले ही निर्णय लेना था, जबकि शासन की गाइडलाइन के अनुसार स्कूलों में इस साल भी 25 फीसद सीटें खाली छोड़ी गई थीं। आरटीई के तहत प्रवेश न होने से जहां बच्चों का एक साल खराब हो गया, वहीं स्कूलों में करीब 4 लाख सीटें खाली रह गईं। हर साल आरटीई के तहत निजी स्कूलों में आधी सीटें ही भर पाती हैं। प्रदेश के स्कूलों में करीब ढाई लाख बच्चों का एडमिशन होता है।
हर साल निजी स्कूलों में आरटीई के तहत गरीब बच्चों के लिए एडमिशन प्रक्रिया अप्रैल से जून के बीच में शुरू कर दी जाती थी। स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस बार कोरोना के चलते स्कूल खुले नहीं तो आरटीई के तहत आवेदन करना मुश्किल था। इस कारण अब तक एडमिशन प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई, जबकि अन्य राज्यों में अब आरटीई के तहत एडमिशन हो चुके हैं। बता दें कि पिछले साल निजी स्कूलों में 3 लाख 58 हजार 887 सीटों के लिए 2 लाख 35 हजार अभिभावकों ने आवेदन किया था। दस्तावेज सत्यापन के बाद 2 लाख 3 हजार 447 बच्चे पात्र पाए गए थे। इनका एडमिशन हुआ।
वर्ष 2010 से लागू हुए आरटीई के तहत शुरूआती कक्षा में 25 फीसद गरीब बच्चों को नि: शुल्क पढ़ाना है। वर्ष 2011-12 में यह प्रक्रिया प्रारंभ की गई। अब तक 20 लाख बच्चों को एडमिशन दिया जा चुका है। शासन की ओर से एक बच्चे के लिए निजी स्कूलों को 4870 रुपए की राशि दी जाती है। इसमें भी शासन की ओर से कई सालों का फीस बकाया है।
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