मोदी के खिलाफ राहुल के साथ सड़क पर अधूरा विपक्ष, सपा-बसपा ने बनाई दूरी!
नई दिल्ली
पेट्रोल-डीजल के दामों में बढ़ोतरी के खिलाफ कांग्रेस ने आज 'भारत बंद' किया है. कांग्रेस को इस बंद में 21 विपक्षी पार्टियों का समर्थन मिला है, लेकिन राहुल गांधी के साथ मंच पर कई सहयोगी दल के नेता नजर नहीं आए. ऐसे में कहा जा सकता है कि मोदी के खिलाफ सड़क पर कांग्रेस अधूरा विपक्ष को लेकर उतरी है.
भारत बंद के खिलाफ कांग्रेस को भले ही 21 दलों ने समर्थन दिया हो, लेकिन सपा और बसपा जैसे बड़े दलों का कोई भी नेता दिल्ली में राहुल गांधी के मंच पर नजर नहीं आया. जबकि विपक्ष दलों की ओर से शरद पवार, शरद यादव जैसे बड़े नेता धरना प्रदर्शन में मौजूद रहे.
हालांकि अखिलेश यादव के ऐलान के बाद आज प्रदेश में किसानों की परेशानियों, पेट्रोलियम पदार्थों के बढ़ते दाम एवं मंहगाई, कानून व्यवस्था की बदहाली, बढ़ते भ्रष्टाचार और छात्रों-नौजवानों के दमन के खिलाफ सपा कार्यकर्ता सूबे के हर जिला तथा तहसील मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं.
वही, बसपा ने जरूर कांग्रेस के भारत बंद को समर्थन किया है. इसके बावजूद न दिल्ली न यूपी कहीं भी बसपा कार्यकर्ता और न ही नेता नजर आ रहे हैं. इतना ही राहुल गांधी के साथ मंच पर भी कोई बसपा का नेता उपस्थित नहीं था. जबकि इससे पहले कांग्रेस द्वारा विपक्ष की तमाम दलों की बुलाई जाने वाली बैठकों में बसपा मायावती भले ही न आती रही हों, लेकिन पार्टी महासचिव सतीश चंद्र मिश्र जरूर उपस्थित रहते थे.
राहुल गांधी की गैरमौजूदगी में भारत बंद को सफल बनाने किए कांग्रेस ने एक खाका तैयार किया. इसके लिए लंबी मीटिंग हुई है. पार्टी के सभी प्रदेश अध्यक्षों को इस बंद को सफल बनाने के निर्देश दिए गए हैं.
कांग्रेस के चाणक्य अहमद पटेल और कांग्रेस के संगठन महासचिव अशोक गहलोत ने बंद को कारगार बनाने के लिए विपक्षी दलों को साधने की जिम्मेदारी उठाई. इसके अलावा कांग्रेस ने शरद यादव के जरिए सहयोगी दलों को साधने की कोशिश की.
दरअसल अहमद पटेल और गहलोत के रिश्ते विपक्षी दलों के बीच ठीक-ठाक हैं. वहीं, शरद यादव के रिश्ते भी सपा और आरजेडी जैसे दलों के साथ काफी हैं. इन नेताओं ने विपक्ष के सभी सहयोगी दलों से बातचीत कर भारत बंद में शामिल होने के लिए समर्थन मांगा.
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