राजनीति में व्यक्गित हितों का त्याग करना होगा: नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद
भोपाल
राज्य सभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद ने कहा है कि राजनीति में व्यक्गित हितों का त्याग करना होगा। मुझे राजनीति में 40 साल हो गये। विधायक, सांसद, मंत्री और मुख्यमंत्री रहा लेकिन आजतक मेरी पत्नी और मेरे दो बच्चों ने मेरा आॅफिस नहीं देखा न सदन की कार्रवाई को देखने की इच्छा जताई। निवास में आने वाले स्टाफ से भी कभी कोई काम नहीं कहा। आजाद ने यह बात रविवार को 15वीं विधानसभा के नव निर्वाचित सदस्यों के लिये आयोजित दो दिवसीय प्रबोधन कार्यक्रम के समापन पर कही।
आजाद ने कहा सबसे कठिन काम नेता बनना होता है। वर्षों राजनीति में सक्रिय रहने के दौरान चुनाव जीत पाते हैं। इसलिये नेता ऐसा हो कि वह हर किसी का काम कराने के लिये आगे रहे। काम की अपेक्षा रखने वाले व्यक्ति को इससे कोई सरोकार नहीं होता कि वह किस धर्म, मजहब और पार्टी के नेता के पास जा रहा है। उसे तो बस एक उम्मीद होती है कि जिसके पास वह जा रहा है, वे उनकी जरूर सुनेंगे। यह सौभाग्य हमें मिला है कि यानि विधायक और सांसदों को कि सवा सौ करोड़ जनता के लिये कानून बनाते हैं।
हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट का जज कानून नहीं बनाता। बड़े बड़े उद्योगपति कानून नहीं बनाते। इसलिये हमें जनता ने चुनकर भेजा है तो उनके हित संरक्षण के लिये हमेंशा आगे रहें। नेता में त्याग और समर्पण की भावना होना चाहिये। राजनीति में बिचौलिये भी बहुत पनपते हैं, उनसे बचते रहना चाहिये। जनप्रतिनिधि को धर्मनिरपेक्ष होना जरूरी है। समापन सत्र के शुरूआत में लोकसभा के पूर्व महासचिव डॉ.सुभाष सी काश्यप ने संसदीय विशेषाधिकार विषय पर अपना वक्तव्य दिया।
विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने कहा कि सभी से अनुरोध है कि बजट सत्र के दौरान सीनियर विधायकों की जगह पहली बार चुनकर आये विधायकों को बोलने का मौका मिले। प्रबोधन कार्यक्रम मंत्रियों के लिये भी आयोजित करने का विचार चल रहा है। प्रजापति ने कहा कि हमने तय किया है कि सदन में जिस प्रश्न पर आश्वासन मिलेगा उसको उसी सत्र के दौरान पूरा करना होगा। पिछले सालों के 1852 आश्वासन लंबित थे, जो अब घटकर 637 हो गये।
नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा कि प्रश्नकाल के दौरान जबतक विधायक को उसके प्रश्न का पूरा उत्तर न मिले तब तक कोई दूसरा विधायक अवरोध पैदा नहीं करे। जिलों से आने वाले 50 फीसदी प्रश्नों के उत्तर सही नहीं होते हैं। वरिष्ठ स्तर पर अधिकारी ध्यान नहीं देते हैं। उत्तर सही, सटीक और प्रमाणिक होना चाहिये। दोनों पक्ष मि जायें तो सत्र के दौरान अच्छा माहौल बनेगा।
संसदीय कार्यमंत्री डॉ.गोविंद सिंह ने कहा कि संसदीय परम्पराओं में कुछ गिरावट आई है। नौकरशाही हावी हो रही है। विधायको द्वारा दिये गये पत्रों का समय पर अफसर जवाब नहीं देते हैं। मैं भरोसा देता हूं कि जिस भी सदस्य के पत्रों का समय पर उत्तर नहीं दिया गया तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी। विधायकों को प्रापर्टी का डिटेल देने का कोई कानून नहीं है लेकिन जनता आपको भी देख रही है इसलिये प्रापर्टी का डिटेल देना चाहिये।
दोपहर के सत्र में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने प्रश्न, प्रश्नकाल, आय व्ययक, अनुदान की मांगों पर चर्चा, कटौती प्रस्ताव, लेखानुदान, अनुपूरक अनुमान और आय व्ययक का पारण विषय पर प्रबोधन दिया। उन्होंने कहा कि विधायकों को सप्लीमेंट्री पूछने के लिये ज्यादा अध्ययन करना चाहिये। सप्लीमेंट्री पूछने के लिये कौन कौन प्रश्न उत्पन्न होते हैं, इसकी कला होना चाहिये। अगर आगे मंत्री बनना है तो सप्लीमेंट्री की तैयारी अभी से करें। सिंह से कई विधायकों ने प्रश्न भी किये। विधायक लक्ष्मण सिंह जैसे ही प्रश्न पूछने के लिखे खड़े हुये तो दिग्विजय सिंह ने कहा-लक्ष्मण सिंह तो अनुभवी हैं, उन्हें प्रश्न पूछने की क्या जरूरत है। विधायक आलोक चतुर्वेदी, वीरेन्द्र सकलेचा, यशपाल सिंह सिसोदिया सहित कई विधायकों ने प्रश्न किये।
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