सरकार ने दी बस चलाने की मंजूरी, WHO की गाइड लाइन का उल्लंघन, बस आॅपरेटरों की मांग मिले टैक्स में छूट
भोपाल
कोरोना संक्रमण रोकने के लिए घोषित लॉकडाउन के बास से प्रदेश की पैतीस हजार बसे बद चल रही है। घाटे की वजह से बस आॅपरेटर बस चलाने के लिए तैयार नहीं है। बस आॅपरेटर अब शराब ठेकेदारों की राह पर है। वे चाहते है कि सरकार लॉकडाउन अवधि के तीन माह का टैक्स माफ करे और कोरोना की वजह से यात्रियों की संख्या कम रहेगी इसलिए बसों का किराया पचास प्रतिशत बढ़ाने की अनुमति दे। लेकिन 24 विधानसभा चुनावों को देखते हुए सरकार किराया बढ़ाने को तैयार नहीं है। परिवहन विभाग ने मध्यप्रदेश के अंदर फुल स्ट्रेन्थ के साथ बस संचालन की अनुमति दे दी है फिर भी घाटे को देखते हुए बस आॅपरेटर बसे नहीं चला रहे है।
मध्यप्रदेश में लॉकडाउन में रियायत देने के बाद बाजार, दुकाने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए शुरु हो चुके है। दो दिन पहले ही परिवहन विभाग के अपर मुख्य सचिव एसएन मिश्रा मध्यप्रदेश के अंदर सामान्य रुप से बसों के संचालन की छूट दे चुके है। केवल अंतरराज्यीय बस परिवहन पर ही प्रतिबंध चल रहा है। लेकिन बस आपरेटर इसके बाद भी बस चलाने को तैयार नहीं है।
बस आॅपरेटरों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि डब्ल्यूएचओ की गाईड लाईन कहती है कि कोरोना से बचाव के लिए सोशल डिस्टेंसिंग जरुरी है। ऐसे मे यदि सामान्य परिस्थिति के अनुरुप सभी सीटों पर सवारी बिठाकर चलाई तो इसका पालन कैसे होगा। वहीं यदि एक भी कोरोना संक्रमित बस में मिल गया तो बस दस से बारह दिन के लिए खड़ी हो जाएगी। सवारी इन बसों में यात्रा करने से पीछे हटेंगे। वहीं बस के ड्राइवर, कंडेक्टर को यात्रियों के संपर्क से कैसे रोक पाएंगे। बसों को रोजाना एक बार सेनेटाईज करने का खर्च भी उठाना पड़ेगा लेकिन बीच में कोई संक्रमित आ गया तो दिक्कत बढ़ जाएगी।
मध्यप्रदेश प्राइम बस आॅनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष गोविंद शर्मा का कहना है कि बस आॅपरेटर लाकडाउन में बसों के बंद रहने की अवधि तीन माह के टैक्स की छूट चाहते है। फाइल मुख्यमंत्री के पास पड़ी है। वहीं डीजल महंगा हो गया है। कर्मचारियों को वेतन पूरा देना पड़ेगा, परिवहन विभाग का टैक्स पूरा देना होगा। सेनेटाईजेशन के खर्चे बढ़ गए है। स्कूल कॉलेज खुले नहीं, सभी बाजार खुले नहीं, धार्मिक स्थलों पर भी आवाजाही कम है। ऐसे में यात्रियों की कमी रहेगी। बसें खाली चलेंगी इसलिए हम चाहते है कि पचास प्रतिशत किराया बढ़ाने की अनुमति दी जाए। दो मांगे पूरी होने के बाद ही हम बस संचालन के बारे में विचार करेंगे।
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