नगरीय निकाय चुनाव में कांग्रेस को झोकनि होगी ताकत, इसलिए नाथ आज दिल्ली में बनाएंगे रणनीति
भोपाल
प्रदेश सरकार को अंतिम व्यक्ति से जोड़ने और कांग्रेस संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की रणनीति बनाने के लिए मुख्यमंत्री कमलनाथ आज दिल्ली में हैं। यहां पर वे राहुल गांधी के साथ ही संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल से मुलाकात इस रणनीति पर मुहर लगाने के लिए कर सकते हैं। उधर प्रदेश में दिग्विजय सिंह शासनकाल की तरह दो उपमुख्यमंत्री बनाए जा सकते हैं। वे प्रदेश की योजनाओं को लेकर केंद्रीय मंत्रियों से भी मुलाकात करेंगे।
मुख्यमंत्री कमलनाथ के आज के दिल्ली दौर के बाद प्रदेश सरकार और प्रदेश कांग्रेस संगठन में बड़े परिवर्तन होने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। उपमुख्यमंत्री बनाए जाने का फार्मूला वही पुराना रह सकता है, जिसमें एक पद ओबीसी के खाते में जा सकता है, जबकि दूसरा पद आदिवासी नेता के खाते में जा सकता है।
सीएम कमलनाथ की दिल्ली में मुलाकात अध्यक्ष राहुल गांधी और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल से होगी। इन दोनों मुलाकातों में प्रदेश कांग्रेस और सरकार को लेकर आगे के रोड मेप की स्थिति भी स्पष्ट हो जाएगी। कमलनाथ प्रदेश में मिली करारी हार की समीक्षा रिपोर्ट लेकर गए हैं। वहीं आठ जून को प्रदेश में होने वाली कांग्रेस कोर कमेटी की बैठक से पहले सीएम की कांग्रेस के कद्दावर पदाधिकारियों से मुलाकात को अहम माना जा रहा है। यहां के निर्देश वे कोर कमेटी में बता सकते हैं। इस रणनीति के तहत प्रदेश के आदिवासी और अन्य पिछड़ा वर्ग को साधने के लिए नेताओं को सरकार में अहम पद दिए जाने की चर्चा हो सकती है। वहीं संगठन को भी बूथ स्तर तक मजबूत करने के लिए कमलनाथ अपनी प्लानिंग लेकर दिल्ली गए हैं।
सूत्रों की मानी जाए तो अब प्रदेश में दो उपमुख्यमंत्री बनाए जा सकते हैं। दिग्विजय सिंह शासनकाल में भी आदिवासी नेता जमुना देवी और ओपीसी लीडर सुभाष यादव उपमुख्यमंत्री बनाए गए थे। अनुसूचित जाति-जनजाति के लिए आरक्षित सीट झाबुआ पर विधानसभा के उपचुनाव होना है। इस उपचुनाव में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया को टिकट देकर यह सीट भाजपा से छीनना चाहती है। भूरिया यदि जीतते हैं तो वे उपमुख्यमंत्री पद के सबसे बड़े दावेदार हो सकते हैं। ओबीसी में पैठ बनाने के लिए कमलनाथ सरकार ने आरक्षण को बढ़ाते हुए 27 फीसदी कर दिया था, लेकिन लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को इसका फायदा नहीं मिला। अब इस वर्ग से एक नेता को ताकतवर बनाकर इस वर्ग में कांग्रेस पैठ बनाने की तैयारी कर सकती है।
कमलनाथ सरकार को अपने काम-काज की ताकत नगरीय निकाय चुनाव में दिखाना होगी। अभी प्रदेश की सभी नगर निगमों में भाजपा का कब्जा है। इसलिए अब जो रणनीति बनाई जा रही है, वह नगरीय निकाय चुनावों को देखते हुए बनाई जा रही है। इसके चलते सरकार और संगठन को मजबूत करने के साथ ही नेताओं की गुटबाजी खत्म करने पर पार्टी का फोकस होगा, इस पर आठ जून को कोर कमेटी की बैठक में चर्चा होगी।
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