यूनिवर्सल हेल्थ स्कीम लागू करने की तैयारी, लेकिन सरकार अस्पतालों का हाल अभी भी बेहाल
रायपुर
छत्तीसगढ़ में हुए विधानसभा चुनाव के बाद सूबे की सत्ता बीजेपी के साथ से फिसलकर कांग्रेस के पास चली गई. सूबे में भले ही सरकार बदल गई है और नई सरकार बने 6 महीने हो गए है लेकिन अभी भी स्वास्थ्य व्यवस्था भगवान भरोसे ही चल रही है. यूनिवर्सल हेल्थ केयर स्कीम सरकार लाने जा रही है लेकिन सरकारी अस्पतालों की स्थिति बेहतर नहीं है. कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में किए वादे के अनुरुप स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त करने और सभी लोगों को मुफ्त स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यूनिवर्सल हेल्थ केयर स्कीम लाने जा रही है.
लेकिन इस स्कीम को लागू करने के बाद आम लोगों का संपूर्ण मुफ्त इलाज केवल सरकारी अस्पतालों में ही होगा. क्योकि सरकारी अस्पतालों की हालत बहुत खराब है. हालत ये है कि लोग सरकारी अस्प्तालों में इलाज कराने ही नहीं जाना चाहते. ऐसे में सरकार की इस हेल्थ स्कीम का लोगों को कितना फायदा मिल पाएगा इसे लेकर भी कई सवाल उठ रहे है. वहीं हाल ही में कोंडागांव में जिस तरह एक आग में झुलसी हुई लड़की को डॉक्टर ने ड्यूटी खत्म होने का बहाना बनाकर इलाज से मना कर दिया और उसकी मौत हो गई. इस तरह के अंसंवेदनशील मामलों से स्वास्थ्य सुविधाओं पर सवाल उठना लाजमी है.
छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर हमेशा से ही राजनीति होती रही है. एक बार फिर इस मामले में विपक्ष सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है. भाजपा प्रवक्ता संजय श्रीवास्तव का कहना है कि 15 सालों में बीजेपी की सरकार ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में ऐसे काम किए थे जिससे जरूरतमंद लोगों के स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकते. लेकिन कांग्रेस सरकार ने पहले आयुष्मान योजना का कबाड़ा कर दिया. फिर ये अब यूनिवर्सल हेल्थ स्कीम लाने की बात कह रही है. स्कीम के नाम पर दो दिनों पर लग्जरी होटल में मीटिंग हुई लेकिन कुछ निर्णय नहीं हुआ, ये इस सरकार की 6 महीनों की उपलब्धि है. वहीं कांग्रेस प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला का कहना है कि सरकारी अस्पतालों की हालत बेहतर की जा रही है. डॉक्टरों की नियुक्त हो रही है. स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर हमारी सरकार कर रही है.
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