‘हुजूर’ ने भाजपा की कराई किरकिरी, चुनाव में कट सकता है शर्मा का टिकट

भोपाल, राजधानी के हुजूर विधानसभा क्षेत्रांतर्गत कोलार स्थित ननि वार्ड 83 में गत दिवस महज सड़क के भूमिपूजन कार्यक्रम को लेकर एक पार्षद के पति श्याम मीना और क्षेत्रीय विधायक रामेश्वर शर्मा के बीच जमकर विवाद और हाथापाई की नौबत ने सत्तारूढ़ दल भाजपा की किरकिरी करा दी। 'Huzur' can cut the BJP's karai Kirikri election, Sharma's ticketदरअसल, इस विवाद के पीछे विधायक शर्मा की दबंग कार्यप्रणाली और भाजपा के ही स्थानीय नेताओं के बीच वर्चस्व की लड़ाई मानी जा रही है। विधानसभा चुनाव के वर्ष में इस तरह की घटना को प्रदेश संगठन ने पूरी तरह गंभीरता से लिया है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि विधायक रामेश्वर शर्मा की चंदा उगाही सहित सभी करतूतों का काला चिट्ठा भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय नेतृत्व के पास भी भेजा जा रहा है। उधर भाजपा के अंदरखाने से खबर आ रही है कि साल के अंत में होने जा रहे विधानसभा चुनाव में रामेश्वर शर्मा का टिकट भी कट सकता है। गौरतलब है कि विधायक शर्मा का यह पहला विवाद नहीं है। इससे पहले भी अपने विवादित बयानों और कार्यों के चलते वे अक्सर सुर्खियों में रहे हैं, जबकि चुनावी साल में प्रदेश भाजपा संगठन कोई विवाद नहीं चाहता है। हाथापाई की आ गई थी नौबत रविवार को सांसद आलोक संजर के साथ भाजपा के दबंग माने जाने वाले विधायक रामेश्वर शर्मा सड़क के भूमिपूजन कार्यक्रम में पहुंचे थे। वहां पर पार्षद मनफूल मीना, उनके पति श्याम सिंह मीना और समर्थक पहले से ही सड़क का भूमिपूजन कर रहवासियों की समस्याएं सुनने खड़े थे। विधायक इसी सड़क के भूमिपूजन के लिए आगे बढ़े, लेकिन पार्षद पति और स्थानीय भाजपा नेता श्याम मीना ने उनका रास्ता रोकते हुए कहा कि सड़क पार्षद निधि से बनी है, इसलिए इसका भूमिपूजन पार्षद ने कर दिया, जबकि विधायक और सांसद भी इसी का भूमिपूजन करना चाहते थे। इस बात को लेकर भाजपा विधायक और पार्षद पति के बीच विवाद के बाद दोनों के समर्थकों में हाथापाई की नौबत आ गई थी। संगठन ने देर शाम दिखाई सख्ती इस मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही मामले ने तूल पकड़ लिया। इस घटना की पूरी जानकारी प्रदेश संगठन ने ली और देर शाम को पार्षद पति श्याम मीना को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया गया। उधर विधायक समर्थकों की शिकायत पर पार्षद पति और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ कोलार थाना पुलिस ने मारपीट और विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया। पार्षद और उसके पति की ओर से भी कोलार थाने में विधायक और उनके समर्थकों के खिलाफ शिकायत की गई, लेकिन विधायक के दबाव के चलते कोलार पुलिस ने उनकी एफआईआर भी दर्ज नहीं की। भोपाल की घटना से संगठन चिंतित, रोज हो रहे विवाद भाजपा नेताओं की बढ़ी महत्वाकांक्षा टिकट के दौरान हो सकता है संघर्ष आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा नेताओं के बीच टिकट पाने की होड़ और बढ़ती महत्वाकांक्षा को लेकर विवाद की स्थिति बन रही है। राजधानी भोपाल में पिछले एक हफ्ते के भीतर भाजपा के अलग-अलग गुटों के नेताओं के बीच सार्वजनिक तौर पर विवाद सामने आ चुके हैंं। इतना ही नहीं, ये नेता आगामी चुनाव में एक-दूसरे को निपटाने और हराने की कसमें खा रहे हैं। इससे नेताओं के बीच खूनी संघर्ष के हालात बन रहे हैं। रविवार को हुजूर विधानसभा क्षेत्र में पार्षद मनफूल मीणा के पति श्यामलाल मीणा के साथ सांसद आलोक संजर और विधायक रामेश्वर शर्मा के बीच हुए विवाद ने प्रदेश नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। इससे पहले महापौर आलोक शर्मा-परिषद अध्यक्ष सुरजीत चौहान का विवाद अभी थमा नहीं है। प्रदेश में चौथी बार सरकार बनाने में जुटी भाजपा में नेताओं के बीच वर्चस्व की लड़ाई बढ़ती जा रही है। भोपाल जिले की लगभग सभी विधानसभा सीटों पर मौजूदा विधायक फिर से टिकट के प्रबल दावेदार हैं, ये विधायक किसी भी कीमत पर अपने विधानसभा क्षेत्र में किसी अन्य नेताओं को नहीं घुसने दे रहे हैं, न ही उसे इतना ऊपर उठने दे रहे हैं, जिससे वह अगले विधानसभा चुनाव में टिकट की दावेदारी कर सकें। यही कारण रहा कि मप्र भाजपा को भोपाल शहर का जिलाध्यक्ष तय करने में दो साल लग गए। आखिर में पूर्व जिलाध्यक्ष सुरेन्द्रनाथ सिंह पर सहमति बनी। सुरेन्द्र सिंह खुद विधायक है, इसलिए दूसरे अन्य विधायकों को उनके नाम पर आपत्ति नहीं थी। अन्य विधायक अपने क्षेत्र के किसी भी नेता को जिलाध्यक्ष बनाने के लिए इसलिए राजी नहीं थे, क्योंकि उन्हें इस बात का डर था कि जिलाध्यक्ष बनने के बाद टिकट की दौड़ में शामिल हो जाते हैं। पिछले कुछ सालों में नेताओं की महत्वाकांक्षा इतनी बढ़ गई है कि वे अब टिकट के लिए भी दावेदारी कर रहे हैं। पिछले हफ्ते महापौर आलोक शर्मा और नगर निगम परिषद अध्यक्ष सुरजीत सिंह चौहान के विवाद को भी इसी से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि निगम सूत्र बताते हैं कि दोनों पदाधिकारियों के बीच निगम में फ्लेक्स के ठेके, पार्किंग वसूली विवाद की वजह बनी। फिलहाल इन दोनों नेताओं के बीच सुलह कराने की जिम्मेदारी सांसद आलोक संजर को सौंपी गई है। अन्य जिलों में भी धड़ों में बंटी भाजपा बेशक भाजपा कैडरबेस पार्टी है, लेकिन चुनाव लड़ने की महत्वाकांक्षा की वजह से नेताओं के बीच आपसी विवाद सामने आने लगे हैं। भोपाल ही नहीं प्रदेश के अन्य जिलों में भी भाजपा नेताओं के बीच गुटबाजी चरम पर है। टिकट के दावेदार नेता एक-दूसरे को कमजोर करने में जुट गए है। भोपाल की तरह अन्य जिलों में भी सार्वजनिक तौर पर नेताओं के झगड़े हो चुके हैं। वे चुनाव में एक-दूसर को हराने की कसमें खा रहे हैं। संगठन ने लिया संज्ञान ऐसी घटनाओं पर भाजपा ने त्वरित संज्ञान लिया है। संभवत: इसी हफ्ते होने वाली कोर कमेटी एवं प्रबंधन समिति की बैठक में इस मसले पर चर्चा हो सकती है। जिसमें यह तय हो सकता है कि झगड़ालू और पार्टी की छवि खराब करने वाले नेता को बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा और उसको टिकट की दौड़ में भी शामिल नहीं किया जाएगा। जल्द ही पार्टी इस तरह की कार्रवाई करके नेताओं को संदेश दे सकती है। नेताओं के स्वागत में लटकी जूतों की माला आमतौर पर नेताओं के स्वागत में वंदनवार, स्वागत-द्वार और फूल-मालाओं के गजरों का सहारा लिया जाता है, मगर प्रदेश की राजधानी की एक बस्ती के लोगों ने सड़कों पर जूते-चप्पल की माला लटका रखी है। वे अपनी सड़क संबंधी समस्या का निदान न होने से नेताओं से बेहद खफा हैं और उनका निराले अंदाज में स्वागत कर रहे हैं। मामला राजधानी के कोलार इलाके की ओम नगर बस्ती का है। यहां की सड़कें मानसून की पहली ही बारिश में कीचड़ से सराबोर हो गर्इं। इससे यहां के निवासियों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। यहां के रहवासी विनोद का कहना है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान राजधानी की सड़कों को अमेरिका से बेहतर बताते हैं, यहां भी आकर कभी देख लें तो पता चल जाएगा कि वास्तव में हाल क्या है। गौरतलब है कि स्वच्छता सर्वेक्षण में भोपाल को देश में दूसरा स्थान मिला है। इसको लेकर नगर निगम से सरकार तक खूब वाहवाही लूट रही है, मगर ओमनगर निवासियों का हाल देखें तो पता चलेगा कि हकीकत कुछ और है। कोई ध्यान नहीं दे रहा रहवासी डीबी खंडाले कहते हैं कि चुनाव आते हैं, तो नेता वोट मांगने आ जाते हैं, मगर उनकी समस्या पर किसी का ध्यान नहीं है। यही कारण है कि यहां आने वाले नेताओं का स्वागत जूतों की माला से किया जा रहा है। यहां के लोग सालों से अपनी सड़क संबंधी समस्या से तमाम नेताओं का अवगत कराते आ रहे हैं, मगर कोई भी इस तरफ ध्यान नहीं दे रहा है। नहीं सुधरे हालात ओमनगर की ही निवासी सीता देवी तो नेताओं की बात सुनते ही भड़क उठती हैं। उनका कहना है, यहां के रहवासियों ने हर अफसर व नेता के दर पर माथा टेका, पर हालात नहीं सुधरे, तो परेशान होकर उन्होंने जूतों की माला तैयार की है। अबकी बार जैसे ही नेता यहां पर वोट मांगने आएंगे तो उन्हें दिखाएंगे कि स्वागत कैसे होता है। नहीं सुन रही अधिकारी कांग्रेस के स्थानीय नेता राहुल राठौड़ का कहना है कि मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव आने वाले हैं। यहां की जनता को जो परेशानी हो रही है, उसका वह सबक सिखाने में पीछे नहीं रहेगी। इसी क्षेत्र से भाजपा की पार्षद मनफूल मीना जनता के गुस्से को जायज मानते हुए कहती हैं कि वे मजबूर हैं, क्योंकि अधिकारी और ठेकेदार उनकी सुनते ही नहीं हैं।