TMC-भाजपा के मुकाबले में कांग्रेस-वाममोर्चा की धड़कनें तेज, UPA के घटक दलों ने भी छोड़ा साथ
नई दिल्ली
पश्चिम बंगाल चुनाव में तृणमूल कांग्रेस और भाजपा की लड़ाई जैसे-जैसे तेज हो रही है, कांग्रेस-वाममोर्चा गठबंधन की धडकनें बढ़ती जा रही हैं। गठबंधन को डर है कि टीएमसी और भाजपा में मुकाबला बेहद करीब होता है, तो उन्हें अपनी रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है। इसके लिए गठबंधन पर दूसरे दलों का दबाव बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस, वाममोर्चा और आईएसएफ का गठबंधन में चुनाव लड़ रहे हैं। गठबंधन के सामने कई चुनौतियां हैं। इन पार्टियों को खुद चुनाव जीतने के साथ यह भी ध्यान रखना है कि भाजपा को किसी तरह का फायदा नहीं मिल पाए। यही वजह है कि सीपीएम ने नंदीग्राम से मनाक्षी मुखर्जी को उम्मीदवार बनाकर ममता को वॉकओवर देने की कोशिश की है।
UPA के कई घटक दे रहे टीएमसी का साथ
यूपीए के कई घटक दल चुनाव में चुनाव में कांग्रेस गठबंधन के बजाए तृणमूल कांग्रेस का समर्थन कर रहे हैं। इनमें राष्ट्रीय जनता दल, झारखंड मुक्ति मोर्चा और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी शामिल है। शिवसेना ने भी चुनाव में ममता बनर्जी का समर्थन किया है। ताकि, वोट का बंटवारा रोका जा सके। इन पार्टियों के टीएमसी को समर्थन ने कांग्रेस पर दबाव बढा दिया है।
मालदा और मुर्शिदाबाद में कांग्रेस के ज्यादे उम्मीदवार
कांग्रेस ने गठबंधन में ज्यादातर उन सीट पर चुनाव लड़ रही है, जो उसका गढ़ माने जाने वाले मालदा और मुर्शिदाबाद में आती है। वहीं वाममोर्चा भी उन सीट पर ज्यादा ध्यान दे रहा है, जहां टीएमसी और भाजपा का मुकाबला नहीं है। ऐसे में गठबंधन ज्यादातर उन सीट पर ज्यादा ध्यान दे रहा है, जहां लोकसभा चुनाव में भाजपा ने टीएमसी के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया था। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में प्रदर्शन को विधानसभा वार देखे तो भाजपा को 121 विधानसभा सीट पर बढ़त थी। वहीं टीएमसी ने 164 सीट पर बढ़त बनाई थी। ऐसे में कांग्रेस वाममोर्चा की कोशिश है कि जिन सीट पर टीएमसी मजबूत थी, उन सीट पर बहुत ज्यादा कोशिश नहीं जाए, बल्कि उन सीट पर ध्यान दिया जाए जहां भाजपा मजबूत है। कांग्रेस की मुश्किल यह है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा सत्ता की दहलीज तक पहुंच जाती है, तो तृणमूल कांग्रेस की हार के लिए उस पर सवाल उठाए जा सकते हैं। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि कांग्रेस उन सीट पर ज्यादा फोकस कर रही है, जहां उनके जीतने की संभावना टीएमसी के मुकाबले ज्यादा है। जिन सीट पर टीएमसी मजबूत है, वहां गठबंधन ज्यादा प्रचार नहीं करेगा।
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