अटल बिहारी वाजपेयी को 'अपना' बनाने में जुटी कांग्रेस!
भोपाल
मध्य प्रदेश में सरकार बदलते ही पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को अपना बनाने की होड़ भी तेज़ हो गई है. एक तरफ जहां कमलनाथ सरकार ने अटल जी के जन्मदिन को सुशासन दिवस के रूप में मनाए जाने की परंपरा को बरकरार रखने का फैसला किया है तो वहीं बीजेपी भी 25 दिसंबर को सुशासन दिवस के रूप में मना रही है. ऐसे में अब सवाल ये उठ रहा है कि आखिर अटल जी किसके हैं!
सरकार में आते ही सीएम कमलनाथ ने भले शिवराज सरकार में जमें दर्जनों आईएएस अधिकारियों को हटा दिया हो, निगम मंडल और बोर्ड को भंग कर दिया हो और तो और नगर निगमों में नियुक्त एल्डर मैन की नियुक्तियां रद्द कर दी हों लेकिन सरकार अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन के मौके पर मनाए जाने वाले सुशासन दिवस की परंपरा को बरकरार रखेगी. कांग्रेस के इस सियासी पैंतरे के बीच अब बीजेपी ने भी ये तय किया है कि वो 25 दिसंबर को सुशासन दिवस के तौर पर मनाएगी.
दरअसल बीजेपी सरकार अटल जी के जन्मदिन को सुशासन दिवस के तौर पर मनाती आई है. इस बार कांग्रेस सरकार के सत्ता में आते ही इस बात को लेकर कयास लगाए जा रहे थे कि क्या अब सुशासन दिवस मनाया जाएगा. इस बीच कमलनाथ सरकार ने आदेश जारी कर तय किया है कि 25 दिसंबर से 30 दिसंबर के बीच पूरे प्रदेश में सुशासन दिवस मनाया जाएगा.
कांग्रेस की मानें तो बीजेपी अटल बिहारी वाजपेयी का इस्तेमाल सियासी फायदे के लिए करती आई है और अटल जी के सुशासन को कांग्रेस समझ रही है. विरोधियों को भी अपना बना लेने की खूबी रखने वाले अटल बिहारी वाजपेयी भले ही अब नहीं हैं लेकिन उनकी जरूरत अब बीजेपी के बाद कांग्रेस को भी लगने लगी है. ऐसे में क्या वाकई में बीजेपी और कांग्रेस के बीच उन्हें अपना बनाने की होड़ है या इसके सियासी मायने हैं. यह देखना दिलचस्प है.
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