brijesh parmar
उज्जैन । मध्य प्रदेश की धर्म और आध्यात्मिक राजधानी महाकाल की नगरी के नाम का डंका आज पूरे देश में बज गया । इस शहर ने देश के छोटे शहरों में स्वच्छता में नंबर एक का स्थान पाया है। पूरे देश में इसका स्थान चौथा है।तीन से 10 लाख की जनसंख्या वाले शहरों में उज्जैन पहले नंबर पर आया है।

राष्ट्रीय स्तर पर स्वच्छता सर्वेक्षण 2019 के परिणाम घोषित किए गए हैं। इंदौर 10 लाख से ज्यादा की आबादी वाले शहरों में तीसरी बार नंबर वन पर आया है। 3 से 10 लाख की आबादी वाले शहरों में धर्मनगरी उज्जैन अव्वल रहा।पहले 10 स्थानों पर उज्जैन संभाग के दो शहर आए हैं जिनमें उज्जैन के साथ देवास भी शामिल है। उज्जैन शुरू से ही नंबर एक शहर की कवायद में लगा हुआ था ।नंबर वन के लिए उज्जैन ने काफी मशक्कत भी की इसी के चलते पिछले तीन सालों में पहली बार उज्जैन अपना स्थान प्राप्त करने में सफल रहा है। उज्जैन के लिए ये उपलब्धि काफी उल्लेखनीय है क्योंकि महाकाल की नगरी होने के कारण यहां पूरे समय बड़ी संख्या में पर्यटकों और भक्तों का आना-जाना रहता है, ऐसे में सफाई व्यवस्था को बनाए रखना बड़ी चुनौती है। उज्जैन ने 5000 में से 4244.47 अंक हासिल कर नंबर एक स्थान हासिल किया।
ओडीएफ डबल प्लस सर्टिफिकेट-
उज्जैन में लोगों को स्वच्छता बनाए रखने, डोर टू डोर कचरा कलेक्शन वाहन में डालने, सूखा एवं गीला कचरा अलग करने की समझाईश दी जाती रही है। छोटे शहरों की श्रेणी में नंबर एक बने उज्जैन की ओर से महापौर मीना जोनवाल ने राष्ट्रपति के हाथों पुरस्कार लिया। इससे पहले उज्जैन को स्वच्छता के लिए क्वालिटी कौंसिल ऑफ इंडिया की ओर से ओडीएफ डबल प्लस सर्टिफिकेट भी मिल चुका है। इस सर्टिफिकेट के तहत मिले 250 अंकों ने ओवरऑल सर्वेक्षण में उज्जैन के लिए अहम भूमिका निभाई।
अनुपयोगी कपड़ो का रिसाईकिल-
शहर में स्वच्छता के लिए आधुनिकता को अपनाया गया है।नगर निगम ने इसके लिए सार्थक पहल की और नवाचार को अपनाया ओर आम जन का सहयोग लिया गया। इसी के चलते पुराने कपड़ो का प्लांट स्थापित किया गया। इस प्लांट में गंदागी और तमाम पुराने कपडों को रिसाईकिल किया जा रहा है।
मंदिर से निकले फूलों से अगरबत्ती-
धर्म नगरी में छोटे बडे मंदिरों से निकलने वाले फूलों की मात्रा काफी रहती है। इसी को देखते हुए उपयोग के बाद फूलों से अगरबत्ती बनाने का प्लांट स्थापित किया गया।मंगलनाथ पर यह प्लांट काम कर रहा है।
गंदे पानी को स्वच्छ में तब्दील करने का प्लांट –
शहर में सिवरेज टेंक और अन्य गंदा पानी साफ करने के लिए भी बेहतर कदम उठाए गए । इसके तहत गंदगी के गड्डे खाली करने के बाद गंदे पानी को स्वच्छ पानी में तब्दील करने के लिए सदावल सिवरेज प्लांट के पास एक नया प्लांट स्थापित किया गया है।
कचरे से खाद बनाने की घर – घर जागृति- नगर निगम ने कचरे से खाद बनाने के लिए गोंदिया ट्रेंचिंग स्थल पर कचरे से खाद बनाने का प्रोसेसिंग प्लांट शुरू किया गया। इसके बाद घरों से लेकर व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में इसे लागू किया गया। इस कार्य के लिए स्वयं सेवी संगठनों को साथ लेकर इसके प्रति जनजागृति फैलाई गई।सुखे और गिले कचरे के लिए शहर में अलग- अलग डस्टबिन लगाए गए ।शहर के 1000 हजार स्थानों पर सुखे और गिले कचरे के लिए अलग – अलग डस्टबिन लगाए गए हैं। घरों से भी गिला सूखा कचरा अलग – अलग ही लिया जा रहा है।
पुराने टायलेट अपडेट, नए भी बनाए-
शहर के व्यवसायिक क्षेत्रों के साथ ही जरूरत वाले स्थानों के पुराने टायलेट को अपडेट करने के साथ ही कुछ स्थानों पर नई व्यवस्था के लिए आधुनिक टायलेट का उपयोग किया जा रहा है।सार्वजनिक स्थानों पर इन टायलेट्स का उपयोग किया जा रहा है।
शिक्षा ओर प्रचार- प्रसार के लिए 2 एजेंसी-
सफाई के लिए नगर निगम उज्जैन ने 4 एजेंसियों का सहयोग लेकर शहर में दिन के साथ ही रात में भी सफाई के काम की शुरूआत की ।निगम के अमले के साथ 4 सफाई एजेंसी का सहयोग लेकर उसके कर्मचारियों का उपयोग सतत रूप से सफाई के काम में लिया जा रहा है। नागरिकों को स्वच्छता की शिक्षा और जनजागरूकता के साथ प्रचार प्रसार के लिए 2 एजेंसियों का सहयोग लिया गया है।
एनजीओ का सहयोग-
नगर निगम ने वेस्ट से बेस्ट के लिए स्वयं सेवी संगठनों के साथ अशासकीय संगठनों का सहयोग भी लिया । इसके तहत संगठन के स्वयंसेवी महिलाएं क्षेत्रों में जाकर बेकार सामग्री से अच्छी सामग्री बनाने का कार्य महिलाओं को सिखाती हैं। बेकार पालीथिन और कपड़ों से पुष्प गुलदस्ते आदि बनाने का काम इसमें मुख्य है।
सफाई कर्मचारियों ने किया भोज का बहिष्कार-
स्वच्छता सर्वेक्षण में नं. 1 बने उज्जैन के सफाई कर्मचारियों ने संयुक्त भोज का बहिष्कार कर दिया है।सफाई कामगार संघ ने नं-1 की उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि जनवरी माह में स्वच्छता सर्वेक्षण के समय सफाई कर्मचारियों द्वारा दिन-रात मेहनत की गई। 12-15 घंटे कार्य किया गया। इसके एवज में नवरी-2019 की तनख्वाह से सफाई कर्मचारियों, जमादारों, दरोगाओं के 1 हजार से 13 हजार तक का वेतन काटा गया, फरवरी माह में भी सफाई कर्मचारियों का लगभग 15 लाख वेतन काटा गया है। सफाई कार्य में संलग्न किसी भी कर्मचारी को साप्ताहिक अवकाश, राष्ट्रीय अवकाश का लाभ भी नहीं दिया गया। इसके अतिरिक्त कई कर्मचारियों को निलंबित किया गया, वेतन वृद्धि रोकी गई। इससे साफ होता है कि उज्जैन को नंबर 1 का खिताब सफाई कर्मचारियों का गला (वेतन) काटकर हासिल किया गया है। फिर भी सफाई कर्मचारी उज्जैन नंबर 1 बना इससे हर्ष व्यक्त करते हैं। सफाई कामगार संघ ने 8 मार्च को नं.-1 की उपलब्धि में निगम की ग्रांड होटल में नगर निगम कर्मचारियों की ओर से निगम प्रशासन द्वारा किये जा रहे भोजन का बहिष्कार किया है।संघ के संरक्षक रामचंद्र कोरट के अनुसार आर्थिक और शारिरिक प्रताडना के साथ कर्मचारियों से काम लिया गया।
भोज में शामिल होने के लिए भी वर्दी में आने की शर्त रखी गई है।कल शाम 4 बजे सफाई कामगार निगम प्रशासनिक भवन में इकठ्ठा होकर अन्य महत्वपूर्ण निर्णय इस मामले में लेंगे।
हमें कचरा मुक्त शहर में शामिल करते हुए 3-10 लाख आबादी वाले शहरों में प्रथम स्थान दिया गया है।हम घरों से 100 फीसदी कचरा उठा रहे हैं।5-10 फीसदी घरों में कचरे से खाद बनाई जा रही है।ऐसे करीब 5500 कंपोजिटर हैं।ऐसे ही कई काम हमने किए हैं। इसमें नगर निगम की सभी विंग का समन्वय सहयोग रहा है।
-योगेन्द्रसिंह पटेल,उपायुक्त एवं नोडल अधिकारी स्वच्छ भारत मिशन,नगर निगम,उज्जैन